सोनभद्र- लीलवाही के श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर के प्रांगण में संघ प्रचारक शारदा प्रसाद द्विवेदी के स्मृति में वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ.अखिल भारतीय भगवान श्री परशुराम अखाड़ा परिषद के पंडित आलोक चतुर्वेदी ने कहा कि शायद ही सोनभद्र के गुप्त काशी क्षेत्र के आम लोगों को यह पता हो कि घोरावल क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव के शारदा प्रसाद द्विवेदी 1983 में संगठन के आदेश पर बलरामपुर लोकसभा से चुनाव लड़े थे. ख्याति प्राप्त श्रमिक चिंतक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के मार्गदर्शन में 1979में भारतीय किसान संघ के उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन मंत्री के दायित्व के निर्वहन में पूर्ण रूपेण सफल प्रमाणित हुए थे. प्रख्यात चिंतक लालजी तिवारी ने कहा शारदा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से ब्रिटिश भारत के काल में ही जुड़े और 78 वर्ष की आयु में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय लखनऊ में 22 नवंबर 2000 तक अंतिम सांस लेकर इस संकल्प को पूर्ण कर गए तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहे न रहे.जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे प्रसिद्ध राजनीतिक चिंतक नानाजी देशमुख द्वारा संचालित दीनदयाल शोध संस्थान गोंडा जयप्रभा ग्राम के निदेशक की भूमिका में पूर्ण रूप से संघ की योजना के अनुसार मिले दायित्व में दक्ष प्रमाणित होकर एक उदाहरण बन गए.1940 में ही नाना जी देशमुख आगरा से शाखा शुरू करने आए थे. और यही नानाजी देशमुख गोंडा प्रकल्प में राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को आमंत्रित किए थे. जनसंघ और जनता पार्टी से राजनीतिक संन्यास के बाद इस प्रकल्प से ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जयप्रभा ग्राम में नाना अनेक योजनाएं संचालित कर रहे थे. इसी ग्राम के निदेशक रहे पंडित निर्वाण दत्त पिता और धर्मनिष्ट माता रजवंती देवी की पांचवी संतान शारदा प्रसाद द्विवेदी जी जिन्होंने गांव लक्ष्मणपुर पोस्ट घोरावल सोनभद्र में पहली किलकारी और शीशुरुदन का गणेश किया था.संघ से जुड़ाव तो पराधीनता काल में ही हो गया था लेकिन 1948 में गांधी जी की हत्या के वातावरण में संघ पर लगे प्रतिबंध के विरोध में शारदा प्रसाद सत्याग्रह करके अपने अन्य स्वयंसेवकों संग जेल गए. उस समय वे बैड़ाड गांव के स्कूल में अध्यापन का कार्य कर रहे थे. विभाग बौद्धिक प्रमुख धनंजय जी ने कहा की श्री द्विवेदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन प्रचारकों के श्रृंखला में ज्योतिर्मान मणि थे जो देश की आजादी के पूर्व संघ में राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए तन समर्पित मन समर्पित और यह जीवन समर्पित कर गए जिला प्रचारक, विभाग प्रचारक समेत जहां भी संघ की योजना बनी वहां- वहां मां भारती की सेवा में एक निष्ठ वर्ती बने रहे.1983 में संगठन के आदेश पर बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और मामूली अंतर से लोकसभा सदस्य नहीं बन सके थे. ग्रीष्मकालीन प्रथम द्वितीय वर्ष के संघ शिक्षा वर्ग में इनके जिमें चिकित्सालय रहा करता था. संघ स्थान पर घायल स्वयंसेवकों की सेवा बड़े मनोयोग से करते थे.घोरावल के लक्ष्मणपुर का यह लाल समाज और राष्ट्र सेवा में कमाल करके किसी की सेवा कराए बिना 22 नवंबर 2000 को पंचतत्व में विलीन होकर सैकड़ो कार्यकर्ताओं के अश्रुपूरित नेत्रों में कर्म की प्रेरणा की स्मृति छोड़ गया. राष्ट्र धर्म तो कल्पवृक्ष है संघ शक्ति रूवतारा है भारत फिर से जगतगुरु हो यह संकल्प हमारा है.कार्यक्रम में आलोक कुमार,राजकुमार चौबे, दयाशंकर पाण्डेय,लछमी झा,प्रभाशंकर पाठक, अशोक पाठक, कुंज बिहारी पाठक रहे.
Author: Pramod Gupta
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