रुक्मणि – कृष्ण के शादी की झांकी संग झूमे श्रद्धालु
(शक्तिनगर) सोनभद्र। श्री अनंतेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण एम ई आई एल कालोनी अनपरा में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण के षष्ठ दिवस कथा व्यास परम पूज्य पंडित वाला वेंकटेश शास्त्री ने श्रीमद् भागवत महापुराण के दशम स्कन्द का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण दशम स्कंद में 90 अध्याय की कथा है जिसमें 49 अध्याय की कथा दशम स्कंध पूर्वार्ध में वर्णित है एवं 50 वे अध्याय से उत्तरार्ध प्रारंभ हो जाता है जैसे ही उत्तरार्ध प्रारंभ होता है भगवान श्री कृष्ण मथुरा पुरी को छोड़कर नए द्वारिका पुरी का निर्माण कर द्वारकापुरी में निवास कर शेष लीला संपन्न किये। इसी प्रकार मानव को चाहिए कि मानव के 49 वर्ष तक की उम्र पूर्वार्ध की गणना में आती है इतने में अपने गृहस्थ आश्रम की व्यवस्था बनाकर जैसे ही 50वें वर्ष में प्रवेश करें तो उत्तरार्ध की श्रेणी अपना कर सन्यास ग्रहण कर भागवत मार्ग अपना कर शेष जीवन का निर्वहन करना चाहिए। इसके पूर्व महाराज श्री ने भगवान के राज रास पंचाध्यायि का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण की रासलीला कोई साधारण लीला नहीं थी काम का मान मर्दन करने और पराजित करने के लिए भगवान यह लीला किए थे। 
इसके उपरान्त शास्त्री जी नंद बाबा सहित गोपी ग्वाल वालों की रक्षा के लिए शंखचूड़ को चाणूर, मुस्टिक सहित कंस का उद्धार कर अपने भक्तों की रक्षा किये। भगवान मात्र 66 दिन की अवधि में संदीपन गुरुकुल आश्रम उज्जैन में सम्पूर्ण शिक्षा प्राप्त किये। दक्षिणा के रूप में मृत गुरु पुत्र को लाकर अपनी गुरु माता को समर्पित किये तदुपरांत जरासंध का आक्रमण हुआ और भगवान मथुरा पुरी को छोड़कर द्वारिका पुरी का निर्माण विश्वकर्मा जी से करवा कर द्वारकापुरी में निवास करने लगे कुंदनपुर के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मीणी का पत्र लेकर जैसे ही ब्राह्मण द्वारिका पुरी में पधारे भगवान कुंदनपुर पहुंचकर लक्ष्मी स्वरूपा माता रुक्मणी का हरण कर द्वारिका पुरी में बड़े ही धूमधाम से अपना पहला विवाह संपन्न कर यह संदेश दे दिए की लक्ष्मी जी का वरण केवल भगवान नारायण ही कर सकते हैं झांकी के माध्यम से रुक्मणी मंगल महोत्सव बड़े ही धूमधाम से संपन्न कराया गया इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय भाव विभोर होकर भजनों की स्वर लहरियों में झूम झूम कर आनंद उठाया
Author: Pramod Gupta
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