डीप बोरिंग कराने पर 50 प्रतिशत और उथले नलकूप की स्थापना पर 50 से 90 प्रतिशत तक मिलेगी आर्थिक सहायता, मानसून पर निर्भरता होगी कम
सोनभद्र। किसानों को सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भरता से राहत दिलाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत निजी सिंचाई संसाधनों के विकास को बढ़ावा दे रही है। योजना के माध्यम से खेतों में डीप बोरिंग और उथले नलकूप की स्थापना कराने पर किसानों को अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों को अपने खेतों तक पानी पहुंचाने में आर्थिक मदद मिलेगी और फसलों की जरूरत के अनुसार समय पर सिंचाई करना आसान होगा। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एमआर मौर्या ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सोनभद्र जिले के लिए कुल 773 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 85 किसानों को डीप बोरिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, जबकि 688 किसानों को उथले नलकूप की बोरिंग कराने पर अनुदान दिया जाएगा। योजना के तहत डीप बोरिंग कराने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। वहीं, उथले नलकूप की स्थापना पर किसानों की श्रेणी के अनुसार 50 से 90 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है। इससे निजी सिंचाई संसाधन विकसित करने में किसानों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। विशेषकर उन किसानों को राहत मिलेगी, जिन्हें बारिश की कमी के कारण फसलों की सिंचाई में परेशानी उठानी पड़ती है। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना का उद्देश्य किसानों को कम लागत में सिंचाई के स्थायी संसाधन उपलब्ध कराना है। खेतों तक पानी की उपलब्धता बेहतर होने से किसान समय पर बुवाई और फसलों की जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकेंगे। इससे एक से अधिक फसल लेने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। सरकार का मानना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
Author: Pramod Gupta
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