मंडी सचिव रविकांत ओझा बोले—जांच कराई जाएगी, सुरक्षा गार्ड बदलकर पूर्व सैनिक कल्याण निगम से रखे जाएंगे; पीड़ित व्यापारियों का दावा—लाखों का नुकसान, दो बाइक और कार भी जलीं
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज स्थित नवीन मंडी समिति में भीषण अग्निकांड के बाद अब मंडी की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार रात करीब 11 बजे के बीच लगी आग में दुकानदारों का सामान जलकर राख हो गया। पीड़ित व्यापारियों के मुताबिक, लहसुन, सिंघाड़ा, कैरेट, चौकी समेत अन्य सामान के साथ दो मोटरसाइकिल और एक कार भी आग की चपेट में आ गईं। व्यापारियों ने लाखों रुपये के नुकसान की बात कही है। वहीं, आग लगने के कारणों को लेकर शॉर्ट सर्किट और जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंकाएं जताई जा रही हैं, लेकिन अभी किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले में मंडी सचिव रविकांत ओझा के बयान ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि मंडी परिसर में सीसीटीवी निगरानी के तार करीब 10-15 दिन पहले आए आंधी-तूफान में कहीं टूट गए थे और उन्हें ठीक कराया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मंडी परिसर में निगरानी व्यवस्था प्रभावित थी, तो उसे दुरुस्त कराने में अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या आग लगने की घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सीसीटीवी के तार टूटे, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
मंडी सचिव रविकांत ओझा ने बताया कि सोमवार रात करीब 10 से 11 बजे के बीच आग लगने की घटना हुई। उन्होंने कहा कि मंडी समिति में अराजक तत्वों के घूमने की शिकायतें रहती हैं। आग कैसे लगी, यह जांच का विषय है और इसकी जांच कराई जाएगी। सीसीटीवी निगरानी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि करीब 10-15 दिन पहले आई आंधी-तूफान में तार टूट गए थे। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को ठीक कराया जाएगा। मंडी सचिव के इस बयान के बाद निगरानी व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। यदि कैमरों की निगरानी प्रभावित थी, तो क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी? क्या घटना के समय किसी अन्य कैमरे या आसपास की दुकानों के कैमरों से फुटेज मिल सकता है? इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। पीड़ित प्रदीप कुमार ने भी बताया कि उनकी दुकान पर कैमरा लगा था, लेकिन आग में उसका डीवीआर और बैकअप जल गया। ऐसे में घटना की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।
बीमा मंडी समिति नहीं कराती, दुकानदारों को व्यक्तिगत बीमा कराने की बात
व्यापारियों के नुकसान की भरपाई के सवाल पर मंडी सचिव रविकांत ओझा ने कहा कि मंडी समिति की ओर से दुकानदारों का व्यक्तिगत बीमा नहीं कराया जाता। उनके अनुसार, दुकानदार अपना बीमा स्वयं कराते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय प्रावधानों के तहत प्रभावित व्यापारियों को अधिकतम संभव लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। अब सवाल यह है कि जिन व्यापारियों का बीमा नहीं है या जिनकी बीमा पॉलिसी में इस प्रकार के नुकसान का प्रावधान नहीं है, उन्हें किस व्यवस्था के तहत राहत मिल सकेगी? मंडी समिति और जिला प्रशासन को नुकसान का आकलन कर पात्र व्यापारियों के लिए उपलब्ध सहायता की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
सुरक्षा गार्ड बदलने की तैयारी, पूर्व सैनिक कल्याण निगम से होगी तैनाती
मंडी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंडी सचिव ने बताया कि वर्तमान में पीआरडी के जवान सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि इनकी जगह पूर्व सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से गार्ड रखे जाएंगे। यह कदम भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बताया जा रहा है, लेकिन व्यापारियों के सामने तत्काल सवाल यह है कि आग लगने की घटना किन परिस्थितियों में हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक थी या नहीं। इसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
‘स्वच्छ मंडी, शुभ मंडी’ अभियान के तहत हटाया गया अतिक्रमण
मंडी में छोटे दुकानदारों को हटाए जाने की शिकायत पर रविकांत ओझा ने कहा कि निदेशक के निर्देश पर ‘स्वच्छ मंडी, शुभ मंडी’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत अवैध अतिक्रमण हटाकर साफ-सफाई कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, जिन छोटे दुकानदारों की आजीविका दुकान या ठेले पर निर्भर है, उनके पुनर्वास और कारोबार की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट नीति सामने आना जरूरी है। सफाई और अतिक्रमण हटाने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि नियमानुसार कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों की आजीविका प्रभावित न हो।
संतोष सोनकर बोले—हर व्यापारी को 25 से 30 लाख तक नुकसान की आशंका
पीड़ित व्यापारी संतोष सोनकर ने बताया कि आग से व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक, कई व्यापारियों का नुकसान लगभग 25 से 30 लाख रुपये तक होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि उनके भाई की कार और दो मोटरसाइकिल भी आग में जल गईं। संतोष सोनकर ने कहा कि व्यापारी इस घटना से बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि विधायक और एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर नुकसान की भरपाई के लिए मदद का आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि आग बुझाने के लिए दमकल की चार गाड़ियां पहुंची थीं। व्यापारियों की मांग है कि नुकसान का वास्तविक आकलन कर उन्हें शीघ्र राहत दिलाई जाए, ताकि वे दोबारा अपना कारोबार शुरू कर सकें।
प्रदीप कुमार की दुकान का सामान और वाहन जले, डीवीआर भी नष्ट
पीड़ित प्रदीप कुमार ने बताया कि आग रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच लगी थी। उनके मुताबिक, उनकी दो मोटरसाइकिल और पीछे खड़ी कार आग की चपेट में आ गईं। दुकान में रखी करीब दस बोरी लहसुन, लगभग दो बोरी सिंघाड़ा, चौकी और 10-15 कैरेट समेत अन्य सामान जलकर राख हो गया। उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह स्पष्ट नहीं है। कुछ लोग शॉर्ट सर्किट की बात कह रहे हैं तो कुछ आग लगाए जाने की आशंका जता रहे हैं। प्रदीप कुमार ने बताया कि उनकी दुकान पर सीसीटीवी कैमरा लगा था, लेकिन आग में डीवीआर और उसका बैकअप भी जल गया।उनकी आपबीती से स्पष्ट है कि नुकसान का आकलन केवल दुकानों को देखकर नहीं, बल्कि जल चुके सामान, फसल, नकदी और वाहनों को शामिल करके किया जाना चाहिए।
अब जांच से सामने आएगी आग की असली वजह
नवीन मंडी अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आग दुर्घटनावश लगी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। फिलहाल शॉर्ट सर्किट अथवा जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंकाएं हैं, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच जरूरी है। मंडी सचिव ने जांच कराने और विभागीय प्रावधानों के तहत सहायता दिलाने का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर, प्रभावित व्यापारी तत्काल सर्वे, उचित क्षतिपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।अब प्रशासन के सामने तीन बड़ी जिम्मेदारियां हैं—आग के कारणों की निष्पक्ष जांच, नुकसान का पारदर्शी आकलन और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करना। व्यापारियों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई और राहत का इंतजार है।
Author: Pramod Gupta
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