October 21, 2026 4:30 am

विजय दशमी पर अभिमानी रावण के प्रतिकात्मक पुतले का दहन, पटाखों से सतरंगी हुई आसमान

असत्य पर सत्य की विजय पर का एक दूसरे को गले लगा दिया शुभकामनाएं

सोनभद्र (दुद्धी) असत्य पर सत्य की विजय के आस्था का प्रतीक विजय दशमी का पर्व मंगलवार को बड़े ही धूम धाम से तहसील क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रो में मनायी गयी। दुद्धी के श्री रामलीला मैदान पर विशाल मेले का आयोजन किया गया जिसमें देर शाम को रावण के 51 फिट के पुतले का दहन आदिशबाजी से की गयी इस बिच पुतला दहन लोगो के आकर्षक का केंद्र बना रहा।रावण दहन उपरांत लोगो ने गले मिलकर एक दूसरे को बधाई दी और आशीर्वाद लिया। इसके पूर्व रामलीला के कलाकारों द्वारा रावण के मरणासन्न अवस्था के पूर्व से बाद का मंचन किया गया। रावण के मरणासन्न के समय भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए।रावण ने कुछ नहीं कहा। लक्ष्मण जी वापस रामजी के पास लौटकर आए। तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है। पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैंने श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई। दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दिया। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके ऐसा कहा था क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था। मेरी दूसरी गलती हुई। रावण ने लक्ष्मण को तीसरी और अंतिम बात ये बताई कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था। ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।अभिमानी रावण के इस प्रशंग को सुन रामलीला मैदान कुछ देर के लिए तालियों की गूंज में खो गई। कार्यक्रम का संचालन पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र नाथ जायसवाल, कोषाध्यक्ष आलोक अग्रहरि एवं अविनाश वाह वाह, ने संयुक्तरूप से किया वही लीला का संचालन कमेटी के मैनेजर कमलेश सिंह कमल और नित्यानंद मिश्रा ने संयुक्तरूप से किया। इस दौरान कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक हरिराम चेरो नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रहरि, महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता मंडल अध्यक्ष दीपक शाह आदि मंचासीन रहे और कार्यक्रम सकुशल सम्पन्न कराया। इस दौरान पुलिस उपाधीक्षक विनय प्रभाकर साहनी प्रभारी निरीक्षक विश्वनाथ प्रताप सिंह, कस्बा प्रभारी संजय सिंह हरिकेश आजाद, पुलिस पीएसी के जवानों के साथ ट्रैफिक कंट्रोल सहित सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहे।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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