बीमा, सुरक्षा प्रमाणपत्र और संचालन की अनुमति सार्वजनिक करने की मांग; जिलाधिकारी से जांच कराकर दोषी मिलने पर सख्त कार्रवाई की मांग
सोनभद्र। शहर में आयोजित ड्रीमलैंड दुबई वर्ल्ड मेले को लेकर अब सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मेले में लगे विशालकाय झूलों को देखकर जहां लोग रोमांचित हो रहे हैं, वहीं स्थानीय नागरिकों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन झूलों के संचालन से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की गई है? क्या मेले का बीमा कराया गया है? झूले पर सवार किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, उसे दिल का दौरा पड़ जाए या कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा—मेला संचालक या संबंधित प्रशासनिक अधिकारी? स्थानीय लोगों का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर लोगों की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मेले में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। ऐसे में विशालकाय झूलों के संचालन में जरा-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। नागरिकों ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मामले का संज्ञान लेकर मेले की सुरक्षा व्यवस्था, बीमा, अनुमति और संचालन संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, फिलहाल बीमा न होने, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन या किसी नियम के खिलाफ संचालन किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल: हादसा हुआ तो जवाबदेही किसकी होगी?
मेले में लगे बड़े-बड़े झूलों को लेकर स्थानीय नागरिकों की चिंता केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि झूले में तकनीकी खराबी आ जाए, कोई हिस्सा टूट जाए, कोई व्यक्ति ऊंचाई से गिर जाए या झूले पर बैठे किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ जाए, तो पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सहायता कौन उपलब्ध कराएगा? नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या मेला संचालक के पास सार्वजनिक दायित्व बीमा है? क्या दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति या उसके परिवार को मुआवजा दिलाने की व्यवस्था है? क्या मौके पर प्राथमिक उपचार, आपातकालीन निकासी और एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है। केवल झूले लगा देना और टिकट लेकर लोगों को बैठाना पर्याप्त नहीं है; लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।सवाल किसी आयोजन का विरोध करने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि मनोरंजन के लिए आने वाले नागरिकों की जान जोखिम में न पड़े।
ड्रीमलैंड दुबई वर्ल्ड मेले में सुरक्षा के इंतजाम कितने पुख्ता? बड़े झूलों पर सवाल, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन!
सप्तमी से नवमी तक संचालन पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने मेले के संचालन की अवधि और समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सप्तमी से नवमी तक मेले में देर तक झूले और अन्य गतिविधियां चलने की बात सामने आई है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि मेले के संचालन की अनुमति कब से कब तक के लिए दी गई है और निर्धारित समय का पालन हो रहा है या नहीं। यदि संचालन की समय-सीमा तय है, तो उसका पालन सुनिश्चित कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। नागरिकों की मांग है कि अनुमति-पत्र, सुरक्षा निरीक्षण रिपोर्ट और संचालन की शर्तों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
जिलाधिकारी से नागरिकों की मांग—सिर्फ अनुमति नहीं, सुरक्षा की भी हो जांच
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ड्रीमलैंड दुबई वर्ल्ड मेले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में प्रमुख रूप से इन बिंदुओं को शामिल करने की मांग की गई है:
मेले और प्रत्येक बड़े झूले के संचालन की अनुमति वैध है या नहीं।
झूलों की तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं या नहीं।
दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे के लिए बीमा कराया गया है या नहीं।
प्राथमिक उपचार, एंबुलेंस और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था है या नहीं।
झूलों पर क्षमता, आयु और सुरक्षा संबंधी निर्देश प्रदर्शित किए गए हैं या नहीं।
मेला किस अवधि और समय तक संचालित करने की अनुमति दी गई है तथा उसका पालन हो रहा है या नहीं।
मनोरंजन स्थलों पर झूलों की सुरक्षा जांच, आवश्यक अनुमति और आपातकालीन इंतजामों को गंभीरता से लेना जरूरी है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या जिम्मेदारी से बचने की बात सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किसी अनहोनी के बाद जवाबदेही तय करने के बजाय हादसे से पहले सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। अब निगाहें प्रशासन पर हैं: क्या ड्रीमलैंड दुबई वर्ल्ड मेले के झूलों की सुरक्षा, बीमा और संचालन की अवधि की जांच होगी? क्या संचालक आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे? और क्या नगरवासियों की आशंकाओं का स्पष्ट जवाब मिलेगा? इन सवालों पर जिला प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
Author: Pramod Gupta
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