ओबरा। नगर पंचायत ओबरा में सीवेज निस्तारण व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित छह एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण शुरू होते ही विवादों में घिर गया। रेणुका नदी के किनारे प्रस्तावित एसटीपी के निर्माण स्थल की जमीन के अधिकार को लेकर शुक्रवार को तापीय परियोजना प्रशासन और नगर पंचायत के बीच विवाद सामने आ गया। परियोजना प्रशासन की आपत्ति के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। शुक्रवार को तापीय परियोजना के सुरक्षाकर्मियों के साथ सीआईएसएफ के जवान निर्माण स्थल पर पहुंचे और मौके पर चल रहे कार्य को बंद करा दिया। अचानक निर्माण कार्य रुकने से निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बन गई। इसके बाद जमीन के अधिकार को लेकर नगर पंचायत प्रशासन और तापीय परियोजना प्रबंधन के बीच विवाद और गहरा गया। बताया गया कि नगर पंचायत क्षेत्र से निकलने वाले घरेलू सीवेज के समुचित उपचार के लिए एसटीपी का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) की ओर से करीब 22.31 करोड़ रुपये की लागत से छह एमएलडी क्षमता वाले प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है। प्लांट के संचालित होने के बाद नगर क्षेत्र से निकलने वाले सीवेज का उपचार किया जा सकेगा और बिना उपचार के गंदे पानी के नदी में जाने पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निर्माण स्थल पर कुछ दिन पूर्व ही प्रारंभिक कार्य शुरू किया गया था। कार्य आगे बढ़ने के दौरान तापीय परियोजना प्रशासन की ओर से जमीन के अधिकार को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। परियोजना प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़ी है। इसी आधार पर शुक्रवार को निर्माण कार्य रुकवा दिया गया।फिलहाल जमीन के स्वामित्व अथवा अधिकार को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में विवाद का समाधान होने तक एसटीपी निर्माण कार्य प्रभावित रहने की संभावना है। परियोजना के रुकने से नगर की सीवेज निस्तारण व्यवस्था को लेकर भी लोगों की निगाहें अब प्रशासनिक स्तर पर होने वाले समाधान पर टिकी हैं।
Author: Pramod Gupta
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