सोनभद्र। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) एवं भीम आर्मी की ओर से 24 सितंबर को देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रस्तावित ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ के तहत सामाजिक न्याय, आरक्षण और विभिन्न वंचित वर्गों की भागीदारी से जुड़ी मांगों को लेकर ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। संगठन का कहना है कि संविधान समानता और समान अवसर का अधिकार देता है, लेकिन SC, ST, OBC, महिलाओं तथा अन्य वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार, राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। संगठन ने आरक्षण को सामाजिक भेदभाव, छुआछूत, सामाजिक-शैक्षणिक वंचना और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व से जुड़ा संवैधानिक प्रावधान बताते हुए आरक्षित पदों और बैकलॉग की भर्ती शीघ्र कराने तथा SC, ST और OBC की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में महिला आरक्षण में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने तथा दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए ‘कोटे के अंदर कोटा’ की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। स्थानीय निकायों में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग उठाई गई।संगठन ने स्पेशल कंपोनेंट प्लान (SCP) के बजट से निर्मित कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के चार मेडिकल कॉलेजों में SC/ST विद्यार्थियों के लिए समाप्त की गई 70 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को कानून बनाकर पुनः लागू करने की मांग रखी। इसके अलावा लोकसभा और विधानसभाओं में OBC को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा राज्यसभा और विधान परिषदों में SC, ST और OBC की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की गई। ज्ञापन में जाति जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम जोड़कर उनकी वास्तविक जनसंख्या का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी आकलन कराने की मांग भी शामिल है। उच्च न्यायपालिका में SC, ST और OBC के प्रतिनिधित्व, न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम व्यवस्था के स्थान पर उच्च न्यायिक आयोग के गठन तथा OBC क्रीमी लेयर की आय सीमा की समीक्षा की मांग की गई। संगठन ने सरकारी सेवाओं में SC, ST और OBC को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने, UGC के उच्च शिक्षा संस्थानों में समता से संबंधित विनियम-2026 को प्रभावी रूप से लागू करने और उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की। ज्ञापन में SC-ST एक्ट के मामलों में पीड़ितों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये करने, पुलिस विवेचना एवं अभियोजन व्यवस्था को जवाबदेह बनाने, सरकारी योजनाओं और बजट में SC, ST, OBC तथा अन्य वंचित वर्गों की आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग भी की गई। इसके अलावा सरकारी ठेकों और खरीद में SC, ST और OBC को आरक्षण का लाभ देने, निजी क्षेत्र में इन वर्गों की प्रबंधन एवं नेतृत्व स्तर तक उचित भागीदारी सुनिश्चित करने तथा मंडल आयोग की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग उठाई गई। केंद्र और राज्य सरकारों में SC, ST और OBC के सभी बैकलॉग पदों को तत्काल भरने तथा समूह ‘क’ की भर्तियों में लेटरल एंट्री समाप्त करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। संगठन ने 2 अप्रैल 2018 के आंदोलन से संबंधित देशभर में दर्ज मुकदमों को वापस लेने, NFS के नाम पर SC, ST और OBC अभ्यर्थियों के कथित शोषण को रोकने तथा पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। विद्यार्थियों के लिए बड़े पैमाने पर छात्रावासों का निर्माण कराने और पर्याप्त छात्रावास उपलब्ध होने तक सुरक्षित एवं सुविधायुक्त किराये के भवनों में किफायती आवास और भोजन की व्यवस्था करने की मांग भी की गई।मीडिया संस्थानों में ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों की भागीदारी बढ़ाने, सफाईकर्मियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर स्थायी नियुक्ति देने, रिक्त पदों पर भर्ती एवं बैकलॉग पूरा करने तथा सफाईकर्मियों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, बीमा और अन्य कर्मचारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। ज्ञापन में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव प्रवेश पूरी तरह बंद कर आधुनिक मशीनों से सफाई कराने तथा सफाईकर्मी की मृत्यु होने पर परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और पुनर्वास देने की मांग भी रखी गई। इसके साथ ही अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों के विरुद्ध अवैध कार्रवाई के आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा करने तथा अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति नियमित कर पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने की मांग की गई। संगठन की ओर से कहा गया कि ज्ञापन में उठाई गई मांगें सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रतिनिधित्व से संबंधित हैं। राष्ट्रपति से संबंधित संवैधानिक संस्थाओं एवं केंद्र सरकार का ध्यान इन मांगों की ओर आकृष्ट कर आवश्यक कार्रवाई के लिए उचित कदम उठाने का अनुरोध किया गया।
Author: Pramod Gupta
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