सोनभद्र। ऐतिहासिक ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर आवाज तेज हो गई है। फेसबुक पर विद्यालय से जुड़ी कई पोस्ट वायरल होने के साथ ही ग्रामीणों के बीच बड़े आंदोलन की तैयारी की चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों ने विद्यालय की शैक्षणिक एवं व्यवस्थागत स्थिति में सुधार की मांग करते हुए जिम्मेदार विभागों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि निजी संस्था डीएवी को विद्यालय दिए जाने के बाद से इसकी स्थिति लगातार खराब हुई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में विद्यालय में करीब 1,523 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर 40 से 50 के आसपास रह गई है। पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का भी आरोप लगाया जा रहा है।
बोर्ड से लेकर खेलकूद तक पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन वर्षों से विद्यालय के गेट पर विद्यालय के नाम का बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। आरोप है कि पुराने बोर्ड को पेंट कराने के बाद दोबारा विद्यालय का नाम नहीं लिखा गया। इसके अलावा नियमित प्रार्थना और राष्ट्रगान नहीं होने, खेलकूद एवं छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं के प्रभावित होने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। विद्यालय परिसर में रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं गेम टीचर से प्रवक्ता का कार्य कराने तथा कक्षा छह से आठ तक के संचालन को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं।
डीएवी को दोबारा हिस्सा दिए जाने की चर्चा से नाराजगी
इधर विद्यालय का कुछ हिस्सा दोबारा डीएवी संस्था को दिए जाने की चर्चा ने ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि जिस विद्यालय में कभी 15 से 20 गांवों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे, वहां छात्र संख्या में इतनी बड़ी गिरावट चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि छात्र संख्या में इतनी बड़ी कमी के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक मामले का संज्ञान क्यों नहीं ले रहे हैं। विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठाई गई है।
गेट बंद कराने और खेल मैदान को लेकर भी मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि विद्यालय के मुख्य गेट पर तत्काल ‘ओबरा इंटर कॉलेज’ का नाम लिखाया जाए। साथ ही इंटर कॉलेज की ओर खुलने वाले गेट को बंद कराया जाए और इंटर कॉलेज के खेल मैदान में डीएवी के बच्चों के आने पर रोक लगाई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समय रहते विद्यालय की शैक्षणिक एवं व्यवस्थागत समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और विद्यालय को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो निर्णायक आंदोलन किया जाएगा। पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले ऐतिहासिक विद्यालय के भविष्य को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
Author: Pramod Gupta
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