सोनभद्र। बभनी (नरेश गुप्ता) बभनी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोंगा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब 40 वर्षीय महिला को मृत समझकर परिजन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले गए। चिता तैयार होने के बाद ग्रामीणों ने उसके शरीर में हलचल और गर्माहट महसूस होने की बात कही। इसके बाद परिजन शव को वापस घर ले आए। दो निजी चिकित्सकों और एक सरकारी चिकित्सक को दिखाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर अगले दिन उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जानकारी के अनुसार कोंगा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान कृष्णानंद की पत्नी दुर्गावती पिछले करीब एक सप्ताह से बीमार थीं। परिजनों के मुताबिक उन्हें पीलिया, प्लेटलेट्स की कमी, खून की कमी तथा पित्त की थैली में सूजन की समस्या बताई गई थी। पहले उनका उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सागों बांध में कराया गया। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर दुद्धी के चिकित्सक से भी उपचार कराया गया। परिजनों के अनुसार दुर्गावती को इलाज के लिए मध्य प्रदेश के सागर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान बुधवार रात करीब 11:48 बजे व्यवहारी, मध्य प्रदेश स्टेशन के पास उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को लेकर गांव लौट आए। दोपहर करीब तीन बजे परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए पागन नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट ले गए। चिता सजाने के बाद जब शव को चिता पर रखा जा रहा था, तभी गांव के कृष्णानंद यादव और रामानंद सहित कुछ ग्रामीणों ने शरीर में नाड़ी चलने तथा हलचल महसूस होने की बात कही। ग्रामीणों ने परिजनों से कहा कि यदि शरीर में नाड़ी चल रही है तो अंतिम संस्कार क्यों किया जा रहा है। मामले की जानकारी के बाद एंबुलेंस बुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन काफी समय तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिजन महिला को ट्रैक्टर-ट्रॉली से वापस घर ले आए। परिजनों ने इसके बाद दो निजी चिकित्सकों तथा एक सरकारी चिकित्सक को दिखाया। हालांकि, चिकित्सकों की ओर से महिला की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। परिजनों का कहना है कि इसके बाद भी शरीर में कोई हलचल दिखाई नहीं दी। करीब चार बजे महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिजनों ने बताई बीमारी की स्थिति
मृतका के पति कृष्णानंद ने बताया कि दुर्गावती की करीब एक सप्ताह से तबीयत खराब थी। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने पीलिया, प्लेटलेट्स की कमी, खून की समस्या और पित्त की थैली में सूजन की बात बताई थी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश ले जाते समय उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। बाद में श्मशान घाट पर कुछ ग्रामीणों ने शरीर में नाड़ी चलने की बात कही, जिसके बाद शव को वापस घर लाया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा—बिना जांच स्थिति पर टिप्पणी संभव नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बभनी के प्रभारी अधीक्षक डॉ. राजन सिंह ने बताया कि उन्होंने उक्त मरीज को स्वयं नहीं देखा था, इसलिए उस समय उसकी वास्तविक स्थिति के बारे में कुछ कहना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय रूप से मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति के जीवित होने की बात की पुष्टि बिना जांच के नहीं की जा सकती। घटना में वास्तव में क्या स्थिति थी, यह संबंधित चिकित्सकीय जांच एवं अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
Author: Pramod Gupta
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