October 10, 2026 4:35 am

सायरन बजते ही संभल जाते हैं ग्रामीण, वज्रपात से बचाव में कारगर साबित हो रहा अलार्म सिस्टम

सोनभद्र। भौगोलिक दृष्टिकोण से पहाड़ी एवं वन आच्छादित दुद्धी तहसील क्षेत्र जहां प्रत्येक वर्ष बज्रपात के चपेट में आने से प्रत्येक वर्ष कुछ न कुछ ग्रामीणों सहित पशुओं की जान चली जाती थी लेकिन केंद्र सरकार की पहल पर राज्य आपदा विभाग द्वारा दुद्धी ब्लाक क्षेत्र को कवर करने के लिए 31 ग्राम पंचायतों में अप्रैल 2023 में एक वर्ष के अनुबंध पर बज्रपात अलार्म सिस्टम लगाई जिसका असर बीते कुछ वर्षों में यह रहा कि आकाशीय बिजली की चपेट से होने वाले मौतों की संख्या में कमी आई इसके लिए प्रशासन के निर्देश पर आपदा विभाग द्वारा जनजागरूकता अभियान खूब चलाई गई। आकाशीय बिजली गिरने से पूर्व अलार्म सिस्टम के सायरन की आवाज से सुनने से लोगों अपने आप को सुरक्षित रखने लगे और इसका लाभ मिलने लगा इसे देखते हुए पुनः अनुबंध को बढ़ा दिया गया और अलार्म सिस्टम को आधुनिक तकनीक से लैस कर दी गई और सोलर सिस्टम से कनेक्ट कर दिया गया ताकि किसी भी परिस्थिति में मशीन कार्य करे और इसकी आवाज दो से तीन किमी तक सुनाई दे।बताया जाता है कि बीड़र, मझौली दुमहान, बघाड़ू, महुली,
अमवार, रज़खड़, जोरूखाड़, फुलवार, खजूरी केवाल बिंड़र करहीया, गडदरवा सहित 31 गांव में कार्यदाई संस्था टेक फॉर टुमारो द्वारा आदित्य लाइटलिंग डिटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम को फिर अपग्रेट कर दिया गया है ताकि सत प्रतिशत सिस्टम का रिस्पांस मिल सके। ग्रामीणों की माने तो यह मशीन 70 फीसदी सही कार्य करती है और आकाशीय बिजली गिरने से पूर्व काफी देर तक तेज ध्वनि में बजती है।लेकिन विडंबना यह है कि शासन द्वारा इस सिस्टम को मेंटेन करने के लिए कोई धन आवंटित नहीं की जा रही जिससे समय–समय पर मेंटेनेंस करने में दिक्कत होती है। कार्यदाई संस्था के आपरेशन हेड राघव शर्मा ने बताया कि यदि समय समय पर धन की उपलब्धता प्रशासन द्वारा की जाती तो मशीनों के रख रखाव में और अधिक सुविधा होती।संस्था द्वारा अभी तक इसे मेंटेन किया जा रहा है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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