October 10, 2026 4:35 am

आदिवासी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

सोनभद्र। विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासी समुदाय की लंबित समस्याओं के समाधान और अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने रॉबर्ट्सगंज नगर के चुर्क तिराहे से जिलाधिकारी कार्यालय गेट तक पैदल मार्च निकाला। इसके बाद राज्यपाल के नाम संबोधित मांग पत्र एसडीएम सदर को सौंपा गया। सीपीआई के जिला सचिव कामरेड आर.के. शर्मा ने कहा कि सोनभद्र प्रदेश का प्रमुख आदिवासी बहुल जनपद है। यहां गोंड, खरवार, बैगा, भुइयां, कोल, चेरो, माझी, पनिका, धूरिया, कोरकू एवं मुसहर-वनवासी सहित विभिन्न आदिवासी समुदाय लंबे समय से निवास करते हैं। इसके बावजूद आदिवासी समाज आज भी भूमि अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ज्ञापन में वनाधिकार कानून-2006 के तहत लंबित एवं निरस्त दावों की निष्पक्ष पुनः समीक्षा कर पात्र लोगों को भूमि पट्टे देने, दावों के निस्तारण तक बेदखली पर रोक लगाने तथा ग्राम सभाओं को उनके अधिकार प्रदान करने की मांग की गई। इसके अलावा सोनभद्र में कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना, दुद्धी, बभनी, म्योरपुर एवं चोपन क्षेत्रों में एकलव्य विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा आदिवासी बहुल गांवों में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की मांग उठाई गई। देव कुमार विश्वकर्मा ने आदिवासी गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, लघु वन उपज के लिए सरकारी क्रय केंद्र स्थापित करने, खनन प्रभावित परिवारों को डीएमएफ के माध्यम से लाभ एवं रोजगार उपलब्ध कराने तथा आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग की। उन्होंने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम का प्रभावी पालन कराने और आगामी जाति जनगणना में ‘आदिवासी धर्म’ के लिए पृथक विकल्प देने की भी मांग उठाई। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा की बेहतर व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना आवश्यक है। शिक्षा के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। सोनभद्र में विश्वविद्यालय की स्थापना होने से जनपद के पिछड़ेपन को दूर करने में मदद मिलेगी और चार राज्यों की सीमा से जुड़े इस जनपद के विकास एवं कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलेगी। वक्ताओं ने कहा कि भाकपा इस मांग को लेकर लगातार आंदोलन करती रही है। अन्य वक्ताओं ने वनाधिकार अधिनियम एवं पेसा एक्ट का जनपद में कड़ाई से पालन कराने की मांग की। कार्यक्रम का नेतृत्व अखिल भारतीय आदिवासी महासभा जिला कमेटी सोनभद्र के संयोजक मंडल के सदस्य अकबर सिंह गोंड, लक्ष्मण बादी, मुन्नीलाल खरवार एवं जगन्नाथ बैगा ने किया। इस दौरान देव कुमार विश्वकर्मा, बसावन गुप्ता, राम जन्म कुशवाहा, अमरनाथ सूर्य, प्रेमचंद गुप्ता, चंदन प्रसाद, हृदय नारायण गुप्ता, मुन्नीलाल खरवार, सूरज बंसल, नागेंद्र कुमार, जगन्नाथ बैगा, बुधवंत, जयपाल सिंह, देवंती देवी, सोनमती, शीतल, राजेंद्र, भगवान दास, कैलाश, सीता देवी, जगबंधन गोंड, बजरंगी गोंड, लक्ष्मण गोंड, जोगेंद्र गोंड समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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