October 10, 2026 5:15 am

पेड़ हैं तो प्राण हैं” अभियान के तहत फलदार पौधों का वितरण, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

सोनभद्र। कोन (मुन्ना लाल जायसवाल) कोन ब्लॉक के तरिया क्षेत्र स्थित खलटंगवा गांव में “पेड़ हैं तो प्राण हैं” जनआंदोलन के तहत आदिवासी परिवारों के बीच फलदार पौधों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जंगलों और प्रकृति का संरक्षण करता आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोग पेड़ लगाते और उनकी देखभाल करते हैं, लेकिन बाद में उन्हें काट दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। तरिया के सामाजिक कार्यकर्ता लक्षमन वादी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समुदाय की विरासत हैं, जिन्हें उनके पूर्वजों ने संरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक संसाधनों को किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीण कन्हैया चेरो ने कहा कि यह केवल जल, जंगल और जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर उचित निर्णय लेगी। रामसूरत सिंह खरवार ने कहा कि किसी भी ग्रामीण का घर उजड़ने नहीं दिया जाएगा और इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। कार्यक्रम में योगेन्द्र, राघवेन्द्र, सीताराम गोंड़, दिनेश चेरो, बाबा बैगा, बासमती, रन्नो, बिंदू खरवार सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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