सोनभद्र। घोरावल क्षेत्र के ग्राम बहेरी निवासी लगभग 80 वर्षीय अशिक्षित आदिवासी वृद्ध विश्वनाथ आदिवासी के परिजनों ने इंडियन बैंक की शिवद्वार शाखा के प्रभारी शाखा प्रबंधक एवं अन्य संबंधित लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि 21 जुलाई को बैंक अधिकारी बैंक की गाड़ी से उनके घर पहुंचे और किसान सम्मान निधि की राशि केवाईसी न होने के कारण न मिलने की बात कहकर विश्वनाथ आदिवासी को बैंक ले गए। आरोप है कि बैंक पहुंचने पर अशिक्षित वृद्ध को वास्तविक जानकारी दिए बिना कुछ दस्तावेजों पर अंगूठा लगवा लिया गया। अगले दिन परिवार के बैंक पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि पुराने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण का नवीनीकरण (रिन्यूअल) कर दिया गया है। परिवार का कहना है कि विश्वनाथ आदिवासी पर पूर्व का लगभग 2.65 लाख रुपये का केसीसी ऋण था, जो ब्याज सहित बढ़कर करीब 6.85 लाख रुपये हो गया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि चुकाना उनके लिए संभव नहीं है।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऋण में गारंटर रहे उनके पुत्र लालजी को भी न तो सूचना दी गई और न ही उनकी सहमति ली गई। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्हें डराया-धमकाया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि पूर्व शाखा प्रबंधक ने एनपीए खाते के लगभग 1.25 लाख रुपये में सेटलमेंट की संभावना जताई थी, जिससे गरीब परिवार को राहत मिल सकती थी। लेकिन वर्तमान अधिकारियों ने कथित रूप से केवाईसी के नाम पर भ्रमित कर ऋण का नवीनीकरण कर दिया, जिससे परिवार गहरे आर्थिक संकट में आ गया। परिजनों का कहना है कि इस घटना से परिवार मानसिक रूप से टूट गया है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, विवादित ऋण नवीनीकरण की वैधानिकता की जांच कराने, दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
बैंक पक्ष का बयान आना शेष
इस संबंध में इंडियन बैंक, शिवद्वार शाखा का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। बैंक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Author: Pramod Gupta
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