सोनभद्र। बीजपुर (विनोद गुप्त) थाना क्षेत्र के झीलों गांव में चल रही नमामि गंगे हर घर जल परियोजना में श्रमिकों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। परियोजना में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए मजदूरों से बिना किसी सेफ्टी उपकरण के काम कराया जा रहा है। इतना ही नहीं कम मजदूरी देने के चक्कर में कार्यदायी संस्था द्वारा नाबालिग बच्चों से भी बाल श्रम कराने के आरोप भी लग रहे हैं। गुरुवार को परियोजना स्थल पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चार मजदूरों को गहरे पानी में भारी-भरकम ब्लॉक डालने के कार्य में लगाया गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि कार्यदायी संस्था द्वारा एक भी मजदूर को जीवन रक्षक जैकेट या अन्य कोई सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराया गया था।काम के दौरान अचानक एक हादसा हो गया जिससे वहां हड़कंप मच गया। पानी में डूबे श्रमिकों को किसी तरह मशक्कत कर बाहर निकाला गया। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई लेकिन इस छोटे हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है और एक बड़ा सबक दे गया है।स्थानीय लोगों और श्रमिकों का आरोप है कि गुरुवार को जब यह हादसा हुआ उस वक्त कंपनी के जिम्मेदार इंजीनियर राजदेव और श्रीपाल रेड्डी खुद मौके पर मौजूद थे। आरोप है कि इन अधिकारियों ने श्रमिकों की सुरक्षा की रत्ती भर भी परवाह नहीं की और उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के भारी-भरकम ब्लॉक देकर गहरे पानी में भेज दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त संस्था पिछले छह वर्षों से क्षेत्र में काम करा रही है लेकिन आज तक मजदूरों की सुरक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अधिक मुनाफे और कम मजदूरी के लालच में नियमों को ताक पर रखकर नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा है। क्षेत्र के संभ्रांतजनो ने कहा कि देश की इतनी महत्वाकांक्षी परियोजना में आखिर किसके शह पर मजदूरों की जिंदगी से यह खिलवाड़ किया जा रहा है क्या प्रशासन इस गंभीर लापरवाही और बाल श्रम के आरोपों पर कार्यदायी संस्था के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएगा या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में कार्यदायी संस्था के खिलाफ भारी आक्रोश है और मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है उधर कार्यदायी संस्था जीवीपीआर के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रह्लाद ने बताया कि कम्पनी में नाबालिक मजदूर काम करते है तो मैने जबरदस्ती नही रखा है वो अपनी मर्जी से काम कर रहे है रही सुरक्षा उपकरणों की तो कम्पनी द्वारा मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए है श्रमिक हमारा कहना नही मानते।









