सोनभद्र। ओबरा तहसील क्षेत्र स्थित सोन नदी में कथित अवैध बालू खनन एवं भारी मशीनों के उपयोग के विरोध में निषाद समाज और क्षेत्रीय ग्रामीणों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों के कारण नदी की प्राकृतिक जलधारा प्रभावित हो रही है, जिससे निषाद समुदाय की आजीविका और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए अवैध खनन की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। जिलाधिकारी से वार्ता के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई के आश्वासन पर संतोष व्यक्त किया।प्रदर्शन के दौरान रोहित बिंद ने कहा कि निषाद समाज के लोग सोन नदी में खेती एवं मत्स्य पालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनका आरोप है कि खनन कार्यों के दौरान नदी की जलधारा को बाधित कर बालू की लोडिंग की जा रही है, जिससे नावों का संचालन प्रभावित हो रहा है और नदी किनारे खेती करने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर बालू निकासी की जा रही है तथा कई स्थलों पर बड़ी मशीनों के माध्यम से नियमों के विपरीत कार्य हो रहे हैं। राजबली उर्फ सनी ने आरोप लगाया कि खनन क्षेत्र की कुछ बालू साइटों पर लिफ्टर मशीनों और जेसीबी के जरिए अवैध खनन किया जा रहा है। उनका कहना था कि नदी के मध्य मशीनों का उपयोग नियमों के विरुद्ध है, जिससे स्थानीय लोगों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है और खेती करने वालों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि खनन गतिविधियों के कारण मछलियों, कछुओं तथा अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि कई बार जलीय जीव मृत अवस्था में भी पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। निषाद समाज एवं ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन की गहन जांच कर पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
Author: Pramod Gupta
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