सोनभद्र। (बीजपुर) ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के उद्देश्य से बनाया गया आरआरसी सेंटर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।करीब 5 से 6 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र लंबे समय से रखरखाव एँव उपयोग के अभाव में कबाड़ होकर बंद पड़ा हुआ है जिससे इसके निर्माण के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। आरआरसी का उद्देश्य गांवों से घर-घर कचरा संग्रहण गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण तथा पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का प्रबंधन करना है। लेकिन यहाँ न तो कचरा संग्रहण की समुचित व्यवस्था शुरू हो सकी और न ही इसके लिए आवश्यक ई-रिक्शा या अन्य संसाधनों की खरीद की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत बीजपुर नेमना सिरसोती डोडहर आदि द्वारा इस परियोजना को संचालित करने के लिए अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। परिणामस्वरूप लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया कचरा केंद्र साल भर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निष्क्रिय पड़ा है। जब इस संबंध में ग्राम प्रधानों से जानकारी लेने का प्रयास किया तो बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है जिसके कारण कचरा केंद्र का संचालन शुरू नहीं हो पाया है हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि यदि केंद्र कचरा का निर्माण एक वर्ष से अधिक पहले पूरा हो चुका है तो अब तक टेंडर क्यों नहीं निकाला गया और संचालन में इतनी देरी किस वजह से हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आरआरसी शुरू होने से गांव में फैले कचरे की समस्या का समाधान हो सकता है स्वच्छता व्यवस्था बेहतर हो सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और पंचायत की जिम्मेदारी बनती है कि इस परियोजना को जल्द से जल्द शुरू कर जनता को इसका समुचित लाभ दिलाया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि हर गाँव मे लाखों रुपये की लागत से बना यह केंद्र आखिर कब तक बंद पड़ा रहेगा और जनता को इसका लाभ कब मिलेगा यह एक सवाल खड़ा है।
Author: Pramod Gupta
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