October 10, 2026 11:59 am

खनन ई-नीलामी में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ऊंची बोलियां खारिज करने पर प्रशासन को फटकार

सोनभद्र। जनपद की चर्चित खनन पट्टा ई-नीलामी प्रक्रिया में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जिला प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने तकनीकी खामियों के आधार पर ऊंची बोलियां निरस्त किए जाने को अनुचित ठहराते हुए सफल घोषित ठेकेदारों के पक्ष में जारी आशय पत्र (एलओआई) निरस्त कर दिए हैं तथा याचिकाकर्ताओं के पक्ष में नए एलओआई जारी करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने मेसर्स कांत कंस्ट्रक्शन कंपनी समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी का मुख्य उद्देश्य राज्य को अधिकतम राजस्व दिलाना होता है। मामूली तकनीकी त्रुटियों के आधार पर प्रतिस्पर्धा को समाप्त करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। यदि दस्तावेजों को लेकर कोई संदेह था तो संबंधित पक्षों को त्रुटि सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था। मामला 12 जनवरी 2026 को जारी खनन पट्टा ई-नीलामी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज समय से ऑनलाइन अपलोड किए थे तथा उनकी हार्ड कॉपी भी जमा की गई थी, लेकिन बाद में मूल हलफनामा, डिमांड ड्राफ्ट और चालान की भौतिक प्रतियां जमा न होने का हवाला देकर उनकी ऊंची बोलियां निरस्त कर दी गईं। इसके बाद संबंधित पट्टे कम दर पर बोली लगाने वाली कंपनियों को आवंटित कर दिए गए।सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वाणिज्यिक बोलियां 24 फरवरी को खोली गईं, जबकि उन्हें निरस्त करने की सूचना 25 फरवरी को जारी की गई। अदालत ने टिप्पणी की कि इससे यह प्रतीत होता है कि पहले सभी बोलियां देखी गईं और बाद में तकनीकी आधार बनाकर ऊंची बोलियों को बाहर कर दिया गया। राज्य सरकार भी यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सकी कि याचिकाकर्ताओं ने मूल दस्तावेज जमा नहीं किए थे। ऐसे में दस्तावेज गायब होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने निविदा सूचना की क्रम संख्या 7, 8 और 9 से संबंधित पुराने एलओआई तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर कांत कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं रुद्रा इंटरप्राइजेज के पक्ष में नए एलओआई जारी करने का आदेश दिया है। अपने आदेश में न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित खनन क्षेत्रों के भूमि स्वामियों को दिया गया ‘राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल’ का अवसर अब समाप्त माना जाएगा, क्योंकि वे पूर्व में निर्धारित शर्तों के अनुसार पट्टा लेने से इनकार कर चुके हैं। अदालत ने कहा कि इस विषय में अब आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट के इस फैसले को सोनभद्र की खनन व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं इस निर्णय के बाद जिले की खनन नीलामी प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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