October 10, 2026 12:00 pm

कुकुरमुत्ते की तरह खुले अवैध क्लीनिक बाप-बेटे का सिंडिकेट और वीडियो कॉल पर अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट

सोनभद्र। बीजपुर (विनोद गुप्त) स्थानीय बीजपुर में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे गरीब मरीजों की जिंदगी और जेब से खिलवाड़ का एक खौफनाक खेल चल रहा है। यहाँ अवैध शब्द का धंधा इस कदर फल-फूल रहा है कि गली-कूचों में कुकुरमुत्ते की तरह अवैध क्लीनिक फर्जी पैथोलॉजी सेंटर और फर्जी नर्सिंग होम खुले हुए है। भीषण गर्मी के इस मौसम में जहाँ सरकारी व्यवस्थाएं सुस्त हैं वहीं इन यमराज के एजेंटों के यहाँ मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्राइवेट प्रैक्टिस और शर्तिया इलाज के नाम पर सीधे-सीधे गरीब मरीजों का खून चूसा जा रहा है। बाजार में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहाँ प्रत्येक बीमारी का इलाज करने का ठेका लेने वाला एक क्लीनिक खुला है। इस क्लीनिक का नेटवर्क बेहद शातिर है। बेटा तो किसी बड़े नामी अस्पताल में डॉक्टर है लेकिन उसका बाप बीजपुर में अवैध क्लीनिक की कमान संभाले बैठा है। ​खेल समझिए बेटे के पास जो भी मरीज पहुँचता है उसे कमीशन और सेटिंग के तहत सीधे बाप के अवैध क्लीनिक पर रेफर कर दिया जाता है। इसके बाद बाप मरीजों को देखने और नकली इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूलता है। यह बाप-बेटे का गठजोड़ स्वास्थ्य सेवा के नाम पर सीधे डकैती है। ​हद तो तब हो गई जब बीजपुर बाजार में चल रहे एक अल्ट्रासाउंड केंद्र की सच्चाई सामने आई।यह केंद्र इस वक्त पूरे इलाके में चर्चा और खौफ का विषय बना हुआ है। यहाँ अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट कोई डिग्रीधारी डॉक्टर नहीं बल्कि पूरी तरह नौसिखिये लड़के तैयार कर रहे हैं। जब इस पर सवाल उठाया जाता है तो अल्ट्रासाउंड संचालक का बेहद बेतुका और हैरान करने वाला दावा सामने आता है कि हम वीडियो कॉल पर बनारस के डॉक्टर से रिपोर्ट बनवाते हैं। क्या वीडियो कॉल पर देखकर मरीजों के पेट और अंदरूनी अंगों की सही जांच संभव है यह सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है। ​इसके अलावा पुनर्वास प्रथम में अवैध रूप से धड़ल्ले से एक्स-रे केंद्र का संचालन किया जा रहा है जिसके पास न तो कोई मानक हैं और न ही सुरक्षा के उपकरण। ​बीजपुर में ड्रग विभाग और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत का आलम यह है कि जो दुकानें सिर्फ दवा बेचने के लिए खुली थीं आज वह पूरे चिकित्सालय और नर्सिंग होम बन चुकी हैं। मेडिकल स्टोर की आड़ में पीछे अवैध रूप से बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है बोतलें चढ़ाई जा रही हैं और बिना डिग्री के धड़ल्ले से सर्जरी तक की जा रही है। दर्जन भर से ज्यादा पैथोलॉजी सेंटर ऐसे हैं जो बिना किसी क्वालिफाइड पैथोलॉजिस्ट के मरीजों को गलत और मनगढ़ंत रिपोर्ट थमा रहे हैं।​जब भी इन अवैध क्लीनिकों की शिकायत उच्चाधिकारियों से की जाती है तो स्वास्थ्य विभाग कागजी खानापूर्ति के लिए जांच टीम का गठन तो जरूर कर देता है।लेकिन इस टीम का खेल तो और भी निराला है। जांच अधिकारी मौके पर पहुंचने से पहले ही इन अवैध चिकित्सकों पैथोलॉजी सेंटरों और अल्ट्रासाउंड संचालकों को फोन पर सूचित कर देते हैं।​ अधिकारियों के कदम बीजपुर में पड़ने से पहले ही सारे अवैध संचालक शटर गिराकर गायब हो जाते हैं। जांच टीम आती है सब ठीक है का बोर्ड लगाती है अपनी जेब गर्म करती है और वापस लौट जाती है। ​​स्वास्थ्य विभाग की इस नूराकुश्ती और भ्रष्ट रवैये से तंग आकर अब ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने सोनभद्र के जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस पूरे नेक्सस की जांच स्थानीय स्वास्थ्य विभाग से न कराकर किसी गोपनीय टीम से कराई जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि गरीब मरीजों का शोषण करने वाले इन फर्जी डॉक्टरों अवैध पैथोलॉजी और वीडियो कॉल वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर तत्काल छापेमारी कर इन्हें सील किया जाए और इनके संचालकों को जेल भेजा जाए।
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Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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