February 12, 2026 3:51 am

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप, ओबरा व रिहन्द डैम में केज मछली पालन कागज़ों तक सीमित

सोनभद्र। ओबरा एवं रिहन्द डैम में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत संचालित केज मछली पालन परियोजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। योजना के तहत लगाए गए लगभग 700 केज में से अधिकांश में मछली पालन न होने का दावा किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को लगभग 12 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी, जिसमें 4.80 लाख रुपये लाभार्थी अंश तथा 7.20 लाख रुपये सरकारी अनुदान के रूप में दिया गया। हालांकि, स्थलीय निरीक्षण में यह सामने आया कि लगभग 75 प्रतिशत केजों में न तो मछली पालन किया गया और न ही केजों पर किसी प्रकार की पहचान या लाभार्थी आईडी अंकित है। सूत्रों के अनुसार, विभागीय टीम को केवल चुनिंदा 25 प्रतिशत सक्रिय केज दिखाकर औपचारिकता पूरी की जाती रही, जिससे वास्तविक स्थिति छिपी रह गई।

बिचौलियों की भूमिका पर सवाल

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों और ठेकेदारों की अहम भूमिका रही। केज स्वीकृति से लेकर स्थापना तक की प्रक्रिया कथित तौर पर बिचौलियों के नियंत्रण में रही। कई लाभार्थियों को यह तक जानकारी नहीं है कि उनके नाम से स्वीकृत केज वास्तव में किस स्थान पर लगाए गए हैं।

वीडियो से हुआ खुलासा

जांच के दौरान सामने आए एक वीडियो में बिचौलिया हिमांचल साहनी केज स्थल पर मौजूद दिखाई देता है। वीडियो में दावा किया गया है कि सदाफल नामक व्यक्ति के नाम से स्वीकृत केज में मछली के बच्चे तक नहीं डाले गए, इसके बावजूद सरकारी भुगतान करा लिया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

अधिकारी के बयान से बढ़ी चिंता

मामले में सहायक मत्स्य निदेशक, सोनभद्र से मौखिक शिकायत किए जाने पर उनका कहना था—
हमें सरकार द्वारा कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे मौके पर जाकर जांच की जा सके। जिओ टैगिंग फील्ड ऑफिसर द्वारा की जाती है और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो के आधार पर ही भुगतान होता है। यह कार्य मेरे स्तर का नहीं है। अधिकारियों के इस बयान को लेकर विभागीय जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

करोड़ों रुपये की इस योजना का उद्देश्य मछुआ किसानों को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन सामने आए तथ्यों ने योजना की निगरानी और क्रियान्वयन प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

  • बिना मछली पालन के भुगतान कैसे किया गया?
  • जिओ टैगिंग और फोटो सत्यापन की वास्तविक जांच किस स्तर पर हुई?
  • जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, गलत भुगतान की रिकवरी तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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