सोनभद्र। करीब दो माह पूर्व आदिवासी व्यक्ति सुरजमन चेरो की गला दबाकर हत्या किए जाने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट सोनभद्र आबिद शमीम की अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने कंपनी के कांट्रेक्टर समेत पांच लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी (सीओ) से कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विवेचना के परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने का आदेश भी दिया गया है। यह आदेश कोन थाना क्षेत्र के गिधियां गांव, टोला डोड़वाखाड़ निवासी अरुण चेरो पुत्र स्व. सुरजमन चेरो द्वारा अधिवक्ता रोशनलाल यादव के माध्यम से दाखिल बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र पर दिया गया। प्रार्थना पत्र के अनुसार 8 अक्टूबर 2025 की रात लगभग 8 बजे अरविंद गुप्ता, विनय गुप्ता, पंकज गुप्ता और धीरज गुप्ता एकराय होकर सुरजमन चेरो के घर पहुंचे और महाराष्ट्र में काम दिलाने के बहाने पिता-पुत्र को जबरन ले गए। विरोध करने पर मारपीट की गई और जबरन दो बाइकों से कोन बाजार ले जाया गया। इसके बाद अरविंद गुप्ता शक्तिपुंज ट्रेन से जबलपुर, नागपुर होते हुए महाराष्ट्र के चंद्रपुर लेकर गया। आरोप है कि 12 अक्टूबर 2025 को दोनों को घुघुस स्थित एक कंपनी में काम पर लगाया गया, जहां निगरानी में रखा जाता था और भागने की कोशिश करने वालों के साथ मारपीट की जाती थी। 10 नवंबर 2025 को सुरजमन चेरो चोरी-छिपे घर लौटने का प्रयास कर रहे थे, तभी अरविंद गुप्ता ने कंपनी के अन्य लोगों की मदद से गमछा से गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।घटना के बाद शव को चंद्रपुर के सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां 12 नवंबर 2025 को पोस्टमार्टम हुआ। उसी दिन शव गांव लाकर अंतिम संस्कार किया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना की सूचना कोन पुलिस व बाद में एसपी सोनभद्र को भी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 28 नवंबर 2025 को आरोपी द्वारा एक लाख रुपये लेने और चुप रहने की धमकी भी दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए पुलिस विवेचना आवश्यक बताया और एफआईआर दर्ज करने के आदेश पारित किए।
Author: Pramod Gupta
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