– खनिज परिहार नियमावली 2021 की सरेआम अनदेखी, घनी आबादी के बीच चल रहा मौत का कारोबार।
सोनभद्र। चोपन थाना क्षेत्र के बर्दिया गांव में अवैध खनन इस कदर बेलगाम हो चुका है कि कानून, नियम और प्रशासन सब बौने नजर आने लगे हैं। बर्दिया स्थित में० अली स्टोन खनन पट्टा, जो अकबर अली पुत्र मजनू भाई के नाम पर आराजी संख्या 941ख, रकबा 2.00 एकड़ में संचालित बताया जा रहा है, एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। कागज़ों में यह खनन पट्टा 3 अगस्त 2016 से 2 अगस्त 2026 तक वैध दर्शाया गया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों तक विभागीय अनुमति के अभाव में बंद पड़े इस खनन पट्टे को जैसे ही हाल में दोबारा अनुमति मिली, पट्टेदार ने नियम-कानून को ताक पर रखकर मनमाना खनन शुरू कर दिया।
खनिज परिहार नियमावली 2021 का खुला उल्लंघन
स्थानीय लोगों के अनुसार खनन स्थल पर
- न कोई प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था है,
- न पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है,
- न धूल नियंत्रण की व्यवस्था,
- न ही वैज्ञानिक तरीके से ब्लास्टिंग/खनन किया जा रहा है।
सबसे गंभीर और भयावह तथ्य यह है कि यह खनन क्षेत्र घनी आबादी (धनी बस्ती) के बिल्कुल समीप स्थित है, जहां हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
दुर्घटनाओं का खुला निमंत्रण
दिन-रात दौड़ते ओवरलोड भारी वाहन, उड़ती पत्थर की धूल, बेतरतीब परिवहन व्यवस्था और तेज रफ्तार ट्रक-ये सभी चोपन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर हाईवे तक दुर्घटनाओं को खुला न्योता दे रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान हर समय खतरे में है।
प्रशासनिक मौन पर सवाल
क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि विभागीय मिलीभगत और प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतना खुला उल्लंघन संभव नहीं। हैरानी की बात यह है कि चोपन पुलिस पूरी तरह मौन है। न कोई जांच, न कोई कार्रवाई-मानो सब कुछ “देखकर अनदेखा” किया जा रहा हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध खनन जनजीवन, पर्यावरण और कानून-तीनों पर सीधा हमला है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़े और जानलेवा हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी?
Author: Pramod Gupta
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