सोनभद्र। रिहन्द डेम में मछली शिकार को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार माह जून 2025 में मछली मारने का पूर्व टेंडर समाप्त हो गया था, जिसके बाद 11 दिसंबर 2025 को नए ठेकेदार को टेंडर आवंटित किया गया। हैरानी की बात यह है कि अब तक मत्स्य विभाग द्वारा संबंधित ठेकेदार को मछली शिकार की विधिवत स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है, इसके बावजूद रिहन्द डेम में धड़ल्ले से मछली मारने का कार्य जारी बताया जा रहा है। आरोप है कि ठेकेदार विभागीय मिलीभगत के सहारे बिना अनुमति ही जाल डालकर मछली शिकार करा रहा है।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि टेंडर की शर्तों के अनुसार विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद ही मछली शिकार की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर कथित रूप से अवैध तरीके से मछली मारने का कार्य किया जा रहा है। इससे न केवल शासन के नियमों की खुली अवहेलना हो रही है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पूरे मामले में मत्स्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। स्थानीय लोगों एवं सामाजिक संगठनों ने मामले का संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर कब तक संज्ञान लेता है और रिहन्द डेम में चल रहे कथित अवैध मछली शिकार पर कब रोक लगाई जाती है।
Author: Pramod Gupta
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