सोनभद्र। चतरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत पटना सहित आसपास के गांवों के किसानों ने नहर का पानी न खोले जाने से नाराज़ होकर सिंचाई विभाग के जेई के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि नरसों बंधी से पटना गांव की लगभग 500 बीघा भूमि तथा सिलथम, लेडुआ, पड़री कलां, गिरियां, मंठहवा, शिवगढ़ समेत अन्य गांवों की करीब तीन हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई होती है, लेकिन पिछले दो सप्ताह से नहर बंद होने के कारण फसलें सूखने की कगार पर हैं। पटना निवासी किसान दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि सिंचाई विभाग के जेई कमलेश द्वारा नहर खोलने का जिम्मा लालू नामक व्यक्ति को सौंपा गया है, जो यह कहकर नहर खोलने से मना कर रहा है कि उसे विभाग से कोई मानदेय या मजदूरी नहीं मिलती। किसानों ने कई बार जेई से नहर खोलने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। किसान राजेश यादव और शिव प्रताप विश्वकर्मा ने बताया कि रबी की फसल गेहूं, सरसों, चना और मटर सिंचाई के अभाव में सूख रही है। बद्री यादव और अमरेश यादव ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही नहर का पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होगी। इस संबंध में जब सिंचाई विभाग के जेई कमलेश से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और नहर खोलने के लिए साफ-सफाई का कार्य कराया जा रहा है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि जेई के बयान के विपरीत साफ-सफाई का कार्य विभाग द्वारा नहीं, बल्कि किसान स्वयं झाड़ियां काटकर कर रहे हैं, जिसके वीडियो भी सामने आए हैं। जेई के बयान और जमीनी हकीकत में अंतर होने से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है और विभाग की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Author: Pramod Gupta
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