February 12, 2026 3:18 am

2027 की बिसात पर पंकज चौधरी: PDA में सेंध, पिछड़ों पर पकड़ की रणनीति

– भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी का चयन, कुर्मी वोट बैंक साधने का बड़ा दांव

लखनऊ। कई महीने की गहन मशक्कत और संगठनात्मक मंथन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वांचल के कद्दावर नेता, सात बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात का अहम मोहरा माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व ने पंकज चौधरी को आगे कर पिछड़ा वर्ग को साधने और विपक्ष के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण में सेंध लगाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। साथ ही, पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि भाजपा अपने मूल काडर और निष्ठावान नेताओं के योगदान को कभी नजरअंदाज नहीं करती।

कुर्मी वोट बैंक की चिंता और पंकज पर भरोसा

यादवों के बाद उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज सबसे प्रभावशाली पिछड़ी जातियों में गिना जाता है और लंबे समय तक यह भाजपा का कोर वोट बैंक रहा है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्मी वोट बैंक में उल्लेखनीय सेंध लगाई, जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ा। 2019 में 62 सीटें जीतने वाली भाजपा 2024 में महज 36 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद से ही पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरे की तलाश में था, जो कुर्मी समाज को फिर से भाजपा के साथ मजबूती से जोड़ सके।

समाज में मजबूत पकड़, संगठन में वरिष्ठता

पंकज चौधरी की नियुक्ति के पीछे एक बड़ा कारण उनकी कुर्मी समाज में गहरी पकड़ मानी जा रही है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा के मूल काडर से जुड़े प्रभावशाली कुर्मी नेताओं में पंकज चौधरी और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ही प्रमुख नाम हैं। हालांकि प्रदेश सरकार में अन्य कुर्मी नेता भी मंत्री और विधायक हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश या तो दूसरे दलों से आए हैं या समाज में उतना प्रभाव नहीं रखते, जितना पंकज चौधरी।

बड़े चेहरे होने के बावजूद खिसका था वोट

लोकसभा चुनाव में अनुप्रिया पटेल जैसे बड़े कुर्मी चेहरे, दो दर्जन से अधिक कुर्मी विधायक और संगठन में कई पटेल नेता होने के बावजूद पार्टी का कुर्मी वोट बैंक खिसक गया था। विश्लेषण में सामने आया कि मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र के कुर्मी बहुल मड़िहान और चुनार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को भारी नुकसान हुआ। वहीं, वाराणसी में रोहनियां और सेवापुरी जैसे कुर्मी बहुल क्षेत्रों में वोट घटने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर भी कम हुआ।

अनुभव और जीत का रिकॉर्ड बना मजबूत आधार

सूत्रों के अनुसार, पार्टी मंथन में यह तथ्य भी अहम रहा कि पंकज चौधरी ने नौ बार लोकसभा चुनाव लड़े और सात बार जीत दर्ज की। सत्ता में न होने के बावजूद भी उन्होंने चुनावी सफलता का सिलसिला बनाए रखा। इसके साथ ही वे वर्तमान समय में भाजपा के सबसे वरिष्ठ कुर्मी चेहरे भी हैं, जिन पर नेतृत्व को भरोसा है कि वे उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज को फिर से भाजपा के पाले में ला सकते हैं।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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