सोनभद्र/बीजपुर(विनोद गुप्त)क्षेत्र में तैनात वर्तमान लेखपाल की कार्यशैली से परेशान ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि कागजात पूर्ण होने के बावजूद लेखपाल सुविधा शुल्क न मिलने पर जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र की रिपोर्ट जानबूझकर गलत आख्या लगाकर आवेदन अस्वीकृत कर दे रहा है जिससे लोगों को सरकारी योजनाओं व जरूरी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।पीड़ितों के अनुसार एक आवेदक ने 28 नवंबर 2025 को जाति प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया था लेकिन 10 दिसंबर 2025 तक फॉर्म लेखपाल तथा तहसीलदार के स्तर पर लंबित पड़ा रहा। आवेदक को किसी संस्थान में नौकरी हेतु आवेदन करना था जिसकी अंतिम तिथि भी 10 दिसंबर ही थी लेकिन लेखपाल की ओर से रिपोर्ट सही और समय पर न लगने के कारण प्रमाण पत्र नहीं बन सका। परिणामस्वरूप उसका आवेदन निरस्त हो गया और उसकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया।इसी तरह दूसरे पीड़ित ने बताया कि लेखपाल की लापरवाही की वजह से उनके पुत्र का जाति प्रमाण पत्र भी समय पर जारी नहीं हो सका जिस कारण उनका पुत्र दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में नामांकन होने के बावजूद किंतु प्रमाण पत्र न बनने के कारण उसका प्रवेश रद्द हो गया जिससे उसका पूरा एक वर्ष बर्बाद हो गया।परिजन के अनुसार बच्चा अब हताशा में है और मानसिक रूप से परेशान है।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि संबंधित लेखपाल द्वारा पोर्टल न खोलना फाइलों में अनावश्यक देरी करना तथा सुविधा शुल्क की मांग करना आम बात हो गई है।लोगों का कहना है कि बार बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से क्षेत्र में आक्रोश बढ़ रहा है।
उक्त लेखपाल की मनमानी और अनियमितताओं से त्रस्त ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए संबंधित लेखपाल के खिलाफ जाँच और कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट कर्मचारियों पर रोक लग सके और आम जनता को राहत मिल सके।









