February 12, 2026 4:00 am

दोषी नक्सली संरक्षणकर्ता संत कुमार चेरो को उम्रकैद तीन सहअभियुक्त साक्ष्य के अभाव में बरी- लगभग 16.5 वर्ष पुराने उमेश चौधरी हत्याकांड में फैसला

सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने लगभग साढ़े 16 वर्ष पुराने उमेश चौधरी हत्याकांड में बुधवार को फैसला सुनाते हुए नक्सली संरक्षणकर्ता संत कुमार चेरो को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर उसे 4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं सहअभियुक्त अनिल ठाकुर, लालब्रत कोल और मुन्ना विश्वकर्मा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया। संत कुमार के भाई बाबा चेरो के फरार होने के कारण उसकी पत्रावली पहले ही अलग कर दी गई थी। प्रकरण के अनुसार, कन्हौरा (थाना चोपन) निवासी दीनानाथ चौधरी ने 25 जनवरी 2009 को तहरीर देते हुए बताया था कि 24 जनवरी की शाम आरोपी संत कुमार चेरो व उसका भाई बाबा उसकी परचून दुकान पर आए थे। पत्नी चंचला द्वारा उधार सामान देने से मना करने पर दोनों ने जबरन कुर्सी उठा ले जाने की कोशिश की। विरोध करने पर उनके बेटे उमेश चौधरी ने हस्तक्षेप किया और विवाद बढ़ गया। लगभग एक घंटे बाद दोनों आरोपी उमेश को घर से बुलाकर ले गए और कुछ दूरी पर ले जाकर गोलियों से हत्या कर दी। मौके पर पहुंचने पर उमेश का शव बरामद हुआ।पुलिस विवेचना में पर्याप्त प्रमाण मिलने पर संत कुमार चेरो व अन्य पर चार्जशीट दाखिल की गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, आठ गवाहों के बयान, तथा समस्त साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद संत कुमार को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सरकारी पक्ष से पैरवी एडीजीसी विनोद कुमार पाठक ने की।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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