– जंगल के जानवर और ग्रामीण एक ही घाट से पानी पीने को मजबूर, हर घर नल जल योजना आधे में अटकी
सोनभद्र। ग्राम पंचायत पंडरी के बोदरा डाँड में आज भी विकास सरकारी योजनाओं की फाइलों में सिमटा हुआ है। स्थिति यह है कि यहां के ग्रामीण जलाशय और चूहाड़ खुदवाकर उसी पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं, जबकि उसी घाट पर मनुष्य, मवेशी और जंगली जानवर तक पानी पीते हैं। ग्रामीणों ने इसे “रामराज्य” की विडंबना बताते हुए अपनी उपेक्षा पर गहरी नाराजगी जताई है। स्थानीय ग्रामीण जयमंगल, सुरेंद्र, मंजू, सुरेश गौतम, अनिल, ओमप्रकाश, हरि, हंसलाल, देवीशरण समेत कई लोगों ने बताया कि आजादी के बाद से लेकर अब तक, 65 वर्षों में यहां न पक्की सड़क बनी, न ऊपर टोले में एक भी हैंडपंप, कुंआ या सरकारी जल स्रोत उपलब्ध कराया गया। बीच टोले में मौजूद एकमात्र निजी कुआँ भी हर वर्ष जनवरी तक सूख जाता है। इसके बाद ग्रामीणों को पहाड़ी किनारे बने जलाशय पर निर्भर रहना पड़ता है।
हर घर नल जल योजना आधे रास्ते में लटकी
ग्रामीणों ने बताया कि हर घर नल जल योजना की पाइपलाइन सिर्फ आधे टोले तक ही बिछाई गई है और उसमें भी अब तक पानी नहीं आया। तीन वर्ष पहले तत्कालीन डीपीआरओ और खंड विकास अधिकारी गांव पहुंचे थे और सोलर फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने के लिए स्थल भी चिन्हित किया था, लेकिन बाद में वह प्लांट 8 किलोमीटर दूर चपरा टोला में स्थापित कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि टोले के पूर्वी और उत्तरी हिस्से में रहने वाले लगभग 40 घरों के ढाई सौ लोग आज भी पानी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।
चार किलोमीटर सड़क बने तो आधी समस्या दूर-ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि आज भी चार किलोमीटर की सड़क कच्ची है। अगर इसे पक्का बना दिया जाए तो न केवल पानी की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी, बल्कि दवा- इलाज, राशन, स्कूल और अन्य सुविधाओं तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। 72 वर्षीय जयमंगल ने कहा कि हम विस्थापन का दर्द 65 वर्षों से सह रहे हैं। आखिर हमारा अपराध क्या है कि हमें पानी तक नसीब नहीं हो रहा?
जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री से मांग की है कि हर घर नल जल योजना की पाइपलाइन सभी घरों तक पहुंचाई जाए, तत्काल नियमित जलापूर्ति शुरू कराई जाए, ऊपर टोले में हैंडपंप या सुरक्षित जल स्रोत उपलब्ध कराया जाए, तथा बोदरा डाँड की कच्ची चार किलोमीटर सड़क को पक्की कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से उम्मीदों के सहारे जी रहे हैं, लेकिन न नेता और न ही कोई अधिकारी अब तक उनकी समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखा रहा।
Author: Pramod Gupta
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