– हमाम में सब नंगे, मुफ़्त का चंदन- घिस मेरे लल्लू
सोनभद्र (समर सैम) सोनभद्र का खनन बेल्ट फिर सुर्खियों में है- लेकिन इस बार बात अवैध खनन की नहीं, बल्कि साफ़-साफ़ सरकारी संपत्ति की लूट की है। सड़क किनारे रखी सरकारी गिट्टी, जिसे नीलामी के बाद राज्य की आमदनी बनना था, वह रातों-रात ग़ायब होती गई… और सिस्टम-बिल्कुल मौन। ऐसा लग रहा था जैसे सबको पता है कि गिट्टी सरकारी है, लेकिन जेब में भरकर ले जाना किसी का भी हक़ है! और जब प्रशासन ने पकड़ा तो ट्रक नहीं रुके… सिर्फ़ कैमरा फ्लैश हुआ! कार्रवाई? नाकाम। निष्क्रिय। नदारद।
हमाम में सब नंगे- मामला इतना साफ़ कि आंखें बंद करने पर भी दिखाई दे रहा है भ्रष्टाचार, सरकारी नीलामी का नोटिफ़िकेशन जारी हुआ, बोलियाँ लगीं, रकम तय हुई-
लेकिन उसी बीच कोर्ट का स्टे आर्डर भी आ गया। नियम के अनुसार, स्टे के बाद नीलामी की एक-एक गिट्टी हिलाना भी अपराध था। लेकिन जमीनी हकीकत? ट्रक आते रहे, गिट्टी भरती रही, माफिया हंसते रहे, विभाग चुप रहा, और सरकारी संपत्ति “चंदन” बनकर घिसती रही…कहावत बिल्कुल फिट बैठ गई- मुफ़्त का चंदन… घिस मेरे लल्लू! सिस्टम ऐसा बना कि जिसकी हिम्मत हो, ट्रक लेकर आओ और सरकारी गिट्टी को अपना माल समझकर ले जाओ। कोर्ट का स्टे-काग़ज़ पर;
जमीन पर-“स्टे की तिलांजलि” नीलामी 27 नवंबर को, स्टे 28 नवंबर को, और ट्रकों का चलना-फिरना लगातार। कोई रोक नहीं। कोई डर नहीं। कोई कार्रवाई नहीं। यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं- यह सुनियोजित सांठगांठ है। सवाल जो सोनभद्र प्रशासन के माथे पर कालिख बनकर चिपक गए
कोर्ट के आदेश के बाद भी ट्रक कैसे चल रहे थे?
गिट्टी उठाने का परमिट किसके इशारे पर जारी/मंज़ूर किया गया?
5 ट्रक पकड़े गए- लेकिन FIR नहीं?
ट्रकों को छोड़ा किसने और किसके दबाव में?
क्या खनिज विभाग इस लूट से अनजान था या जानकर चुप था?
“खनिज विभाग की खामोशी”-लूट का सबसे बड़ा संरक्षक
जिस विभाग को खनन माफिया पर लगाम कसनी चाहिए-
वही विभाग “मूक दर्शक” बनकर बैठा रहा।
ना निरीक्षण
ना रिपोर्ट
ना कार्रवाई
ना निगरानी
सवाल यह नहीं कि विभाग सो रहा है,
सवाल यह है कि—
विभाग को किसने सुला रखा है?
इसी बीच- BJP नेता एवं समाजसेवी विनय श्रीवास्तव का बड़ा हस्तक्षेप
जब सिस्टम के पहिए जाम हो गए,
जब विभागों की आंखें बंद थीं,
जब ट्रकों की गड़गड़ाहट पर भी प्रशासन बहरा बना रहा-
उसी वक्त BJP नगर अध्यक्ष रॉबर्ट्सगंज एवं समाजसेवी विनय श्रीवास्तव सामने आए।
उन्होंने जिला अधिकारी से मिलकर
कड़ी कार्रवाई की मांग वाला विस्तृत ज्ञापन सौंपा,
और यह साफ़ कह दिया कि-
“सरकारी गिट्टी की चोरी, सत्ता-प्रशासन-माफिया गठजोड़ का परिणाम है।”
विनय श्रीवास्तव पहले भी खनन माफिया, अवैध परिवहन और विभागीय भ्रष्टाचार पर खुलकर बोलते रहे हैं।
वह उन चंद नेताओं में से हैं
जो खनिज विभाग की सोई आत्मा को जगाने की हिम्मत रखते हैं।
उनकी सक्रियता के कारण यह मामला लगातार सार्वजनिक चर्चा में है,
वरना इसे भी बाकी मामलों की तरह धूल चटा दी जाती।
सोनभद्र में सरकारी गिट्टी की यह “लूट” सिर्फ चोरी नहीं,
पूरा तंत्र नंगा हो गया है।
और जब तक विनय श्रीवास्तव जैसे लोग आवाज़ नहीं उठाएंगे,
तब तक सरकारी माल लुटता रहेगा,
और सिस्टम हंसता रहेगा।
क्योंकि यहाँ-
हमाम में सब नंगे,
और मुफ़्त का चंदन- घिस मेरे लल्लू!
Author: Pramod Gupta
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