सोनभद्र। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल आज सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) सोनभद्र डिपो विश्राम सिंह से मिला और जिले में रोडवेज बस संचालन से जुड़ी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। प्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान की कोई प्रभावी संभावना दिखाई नहीं दे रही है।
3.49 करोड़ की लागत से बना बस स्टैंड ‘बेकार’
जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने बताया कि 3 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से निर्मित रोडवेज बस स्टैंड अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहा है। मिर्जापुर डिपो की बसें वर्षों से फ्लाईओवर के नीचे खड़ी की जा रही हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है और कई बार एंबुलेंस तक फंस चुकी हैं। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर के नीचे ही पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा भी संचालित होती है, जहां भीड़ और अव्यवस्था के कारण अराजक तत्व सक्रिय रहते हैं और पूर्व में चोरी की घटनाएँ भी दर्ज हो चुकी हैं। इससे बैंक ग्राहक स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं।
मिर्जापुर एआरएम ने दिखाई अनभिज्ञता
शर्मा ने बताया कि जब इस मुद्दे पर एआरएम मिर्जापुर से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताई और कहा कि “यह सोनभद्र डिपो का विषय है।” जब उनसे पूछा गया कि मिर्जापुर डिपो की बसें यहां इन-आउट होती हैं या नहीं, तो उन्होंने जवाब दिया कि “बाबू बीमार हैं, ठीक होने के बाद देखकर बताएंगे।”
रात में गेट बंद, महिलाओं-बच्चियों को सबसे ज्यादा परेशानी
जिला महामंत्री प्रीतपाल सिंह ने आरोप लगाया कि सोनभद्र डिपो के गेट पर रात में ताला लगा दिया जाता है, जिससे यात्री अंदर बैठकर बस का इंतजार तक नहीं कर पाते। महिलाओं और बच्चियों को सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है, जो अत्यंत असुरक्षित है। उन्होंने यह भी कहा कि जनरथ एसी बसें डिपो में प्रवेश ही नहीं करतीं और फ्लाईओवर से ही सीधे निकल जाती हैं, जिससे यात्रियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। रात में आने वाली बसें भी शहर में प्रवेश न कर बाहरी हिस्से में ही यात्रियों को उतार देती हैं, जहाँ से आगे जाने के साधन उपलब्ध नहीं होते।
शौचालय- पानी की सुविधा से भी वंचित
नगर अध्यक्ष प्रशांत जैन ने बताया कि रात में गेट बंद होने के कारण यात्री डिपो की मूलभूत सुविधाओं—शौचालय और पेयजल—से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने एआरएम के उस बयान को भी ‘अतार्किक’ बताया जिसमें कहा गया कि “जब प्राइवेट बसें खड़ी रह सकती हैं, तो रोडवेज की क्यों नहीं।”
कैंटीन संचालन पर सवाल
जिला कोषाध्यक्ष शरद जायसवाल ने कहा कि डिपो परिसर में कैंटीन के लिए बनी दुकानें बंद पड़ी हैं और कार्यालय परिसर में ही कैंटीन चलाई जा रही है, जो नियमों के विरुद्ध है। प्रतिनिधिमंडल में उपस्थित कौशल शर्मा (जिला अध्यक्ष), प्रीतपाल सिंह (जिला महामंत्री), शरद जायसवाल (जिला कोषाध्यक्ष), प्रशांत जैन (नगर अध्यक्ष), गुरप्रीत सिंह सोखी (नगर मंत्री), अमित वर्मा, पुनीत जैन, अमित अग्रवाल (नगर संयोजक) सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
Author: Pramod Gupta
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