सोनभद्र। जनपद में जैसे ही क्रशर परिवहन चालू हुआ, क्षेत्र के पट्टेदारों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी-मानो बरसों बाद बंद पड़ा रास्ता खुल गया हो। लेकिन यह खुशियां अधिक समय तक टिक नहीं सकीं। भारत सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत खान सुरक्षा निदेशालय द्वारा जारी कार्य-सूचनाओं ने पूरे खनन क्षेत्र को प्रभावित कर दिया। खान सुरक्षा महानिदेशालय, वाराणसी क्षेत्र द्वारा पत्र संख्या एस-290/3 दिनांक 2 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते लगभग 37 खदानों को बंद कर दिया गया। पत्र जारी होते ही खनन क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। इधर यूनियन व स्थानीय संगठनों द्वारा प्रदेश सरकार, राजस्व विभाग और पट्टेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने लगे। जिलाधिकारी सोनभद्र को भेजे गए पत्र में खान सुरक्षा निदेशक, वाराणसी ने अवगत कराया कि सोनभद्र की तहसील ओबरा के ग्राम बिल्ली-मारकुंडी स्थित स्वीकृत डोलो स्टोन/पत्थर खदानों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान धात्विक खान विनियम, 1961 के गंभीर उल्लंघन पाए गए, जिसके आधार पर खान अधिनियम, 1952 की धारा 22(3) एवं 22A(2) के तहत आदेश पारित किया गया। खदान संचालकों को सुधार योजना (Scheme of Rectification) और अद्यतन खान नक्शा (Updated Mine Plan) 15 दिनों के अंदर जमा करने का निर्देश दिया गया था, जिसकी प्रतिलिपि जिला प्रशासन को भी भेजी गई थी। परंतु आज तक किसी भी खदान मालिक द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए गए। इससे प्रतीत होता है कि खदान मालिक सुरक्षा उल्लंघनों के निराकरण के प्रति गंभीर नहीं हैं। निर्देशालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक सुधार योजना के अनुमोदन, अनुपालन और आगे के संचालन की अनुमति प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक खदानों में खनन कार्य पूर्ण रूप से बंद रहेंगे। साथ ही खनिज परिवहन भी रोक दिया जाए। यह आदेश खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अति आवश्यक बताते हुए जारी किया गया है।
Author: Pramod Gupta
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