सोनभद्र। 29 नवम्बर जिला स्तरीय उद्योग बंधु की बैठक मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में संपन्न हुई। बैठक में पूर्व में उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
ट्रांसफार्मर सुरक्षा, डिजिटल एक्स-रे और रंबल स्ट्रिप्स का मुद्दा फिर उठा
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने बताया कि नगर के ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा, जिला अस्पताल की डिजिटल एक्सरे मशीन की मरम्मत, मिर्जापुर डिपो की बसों को फ्लाईओवर के नीचे खड़ा करने की व्यवस्था, तथा स्कूल-बाजार एवं घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऊँचे रंबल स्ट्रिप्स जैसी समस्याओं पर बार-बार मांग पत्र दिए जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं हो सका है।
आवारा कुत्तों और छुट्टा पशुओं की समस्या-स्थिति जस की तस
श्री शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को स्पष्ट निर्देश दिया था कि सड़कों, राजमार्गों, स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों एवं पशुओं को हटाया जाए। इसके बावजूद पूरे जनपद में आवारा कुत्तों और छुट्टा पशुओं की भरमार है। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर को घोरावल में एक ही दिन 10 लोग कुत्तों के हमले में घायल हुए, जिनमें पांच की स्थिति गंभीर थी।
सार्वजनिक शौचालय बदहाल, ग्रामीण महिलाओं को हो रही परेशानी
जिला अध्यक्ष ने बताया कि जिले में रोज़ाना सैकड़ों महिलाएं और बच्चियां खरीदारी के लिए आती हैं, लेकिन नगरीय और नगर पालिका क्षेत्र में बने सार्वजनिक शौचालय बेहद दयनीय स्थिति में हैं। कई पर ताला लटका है, कई बिना दरवाजे खुले पड़े हैं, और अंदर गंदगी का ढेर लगा है। ये सभी शौचालय स्वच्छ भारत मिशन की भावना के विपरीत हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल-150 से अधिक अवैध अस्पताल
उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों और भारी बजट के बावजूद जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 98 अस्पतालों को छोड़ भी दिया जाए, फिर भी 150 से अधिक निजी अस्पताल बिना पंजीयन के चल रहे हैं। उन्होंने एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मानकों का हवाला देते हुए कहा कि आईसीयू वाले अस्पतालों में 3 डॉक्टर और 3 पैरामेडिकल फुल टाइम अनिवार्य, ट्रामा सेंटर में न्यूरो और ऑर्थो स्पेशलिस्ट की 24 घंटे उपलब्धता, सभी डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ का एनएमसी में पंजीयन, डिस्प्ले बोर्ड पर केवल पंजीकृत स्टाफ की फोटो सहित जानकारी, अस्पतालों में 24 घंटे ऑक्सीजन, प्रमाणित ओटी टेक्नीशियन, निश्चेतक और सर्जन की मौजूदगी आवश्यक, लेकिन इन मानकों का व्यापक रूप से पालन नहीं किया जा रहा।
एंबुलेंस सेवाएं वेंटिलेटर’ पर, मरीजों की जान खतरे में
उन्होंने कहा कि जिले की एंबुलेंस सेवाओं का हाल बदहाल है। अधिकांश वाहनों में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, प्राथमिक उपचार किट, ऑक्सीजन सिलेंडर, आपातकालीन दवाएं, स्ट्रेचर, टॉर्च, अग्निशमन यंत्र जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। एंबुलेंस की जगह टैक्सी चल रही है, जिससे दुर्घटना पीड़ित आए दिन दम तोड़ रहे हैं। बैठक का संचालन उपायुक्त उद्योग विनोद चौधरी ने किया। मुख्य रूप से जिला महामंत्री प्रीतपाल सिंह, जिला उपाध्यक्ष नागेंद्र मोदनवाल, नगर उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सोखी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
Author: Pramod Gupta
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