सोनभद्र। दक्षिणांचल के दुद्धी नगर में स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही एक बार फिर सुर्खियों में है। यहाँ के कई निजी अस्पताल बिना पंजीकरण के खुलेआम संचालित हो रहे हैं, और जिन अस्पतालों को गंभीर अनियमितताओं के चलते सील किया गया था, वे भी दोबारा चालू कर दिए गए हैं। ताज़ा मामला रामनगर रोड स्थित देव हॉस्पिटल का है, जहाँ हाल ही में प्रसूता और नवजात की सर्जरी के बाद मौत हो गई। यह वही अस्पताल है जिसे पूर्व में दो बार सील किया जा चुका था। इस घटना के बाद डॉक्टर दंपती पर मुकदमा तो दर्ज किया गया, मगर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित रही। स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि प्रशासन की यह चुप्पी “जीरो टॉलरेंस” नीति का मज़ाक बना रही है। कई सूत्रों के अनुसार, अस्पताल संचालक स्वास्थ्य विभाग से लेकर सीएमओ कार्यालय तक सब “मैनेज” कर लेते हैं, जिसके कारण सील किए गए हॉस्पिटल भी निर्भीक होकर चालू रहते हैं। इस बीच, विभाग में हाल ही में हुए बदलावों ने भी संदेह बढ़ा दिया है। नोडल अधिकारी गुलाब यादव को हटाकर उनके सहायक डॉ. कीर्ति आज़ाद बिंद को नोडल अधिकारी बना दिया गया है, जबकि डॉ. गुरु प्रसाद को उनका सहायक नियुक्त किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही अधिकारी पहले भी अवैध हॉस्पिटलों और नर्सिंग होम्स के संचालन में संलिप्त रहे हैं- आरोप है कि ये सीज़ तो करते हैं, मगर “लेनदेन” के बाद अस्पताल दोबारा खुलवा देते हैं। इन नियुक्तियों ने सीएमओ विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक यह “मिलाजुला खेल” चलता रहेगा और कब इन बेखौफ संचालकों पर वास्तविक विधिक कार्यवाही होगी।
Author: Pramod Gupta
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