सोनभद्र।। जिले में खनन और परिवहन की अनियंत्रित गतिविधियों ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। गांवों और मुख्य मार्गों पर दिनभर धूल का ऐसा तूफ़ान उठता है कि राहगीरों की साँस लेना भी दुर्लभ हो जाता है। सड़क पर चलने वाले बच्चों और बुज़ुर्गों की आंखें लाल हो रही हैं, लोग भारी ख़ांसी और सांस की समस्याओं से जूझ रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभागों ने अब तक इस पर कोई ठोस कदम उठाना आवश्यक नहीं समझा। यह क्षेत्र भले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही सरकार का हिस्सा हो, पर ज़मीनी हालात देखकर लोग सवाल पूछने लगे हैं कि आख़िर खनन माफ़िया को यह खुली छूट कौन दे रहा है? खनन विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के अधीन आता है, ऐसे में सड़कें धूल की चादर से ढकी रहें और PWD व प्रशासन चुप रहे, यह गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी PWD के पास है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कई मार्गों पर महीनों से पानी का छिड़काव तक नहीं कराया गया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि “यहाँ कानून कमज़ोर नहीं है, लागू करने वाली इच्छाशक्ति कमजोर है।”
ग्रामीण बताते हैं कि जब भी कोई आवाज़ उठती है तो उसे “जांच के नाम” पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। और इस बीच सैकड़ों ट्रक दिन- रात धूल उड़ाते हुए गुजरते रहते हैं।लोगों में यह भी चर्चा है कि अगर आज इस स्थिति पर सवाल उठाना “सरकार विरोध” माना जा रहा है तो कल सरकार बदलेगी तो उन्हीं फ़ाइलों को निकालकर राजनीतिक रंग दिया जाएगा। ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ एक सरकार या नेता का नहीं, प्रशासनिक ज़िम्मेदारी और जनस्वास्थ्य का है। आज सवाल सिर्फ इतना है- क्या जनता की सेहत से होता यह खिलवाड़ कब रुकेगा? क्या सोनभद्र की सड़कें और सांसें कभी साफ़ होंगी? और सबसे बड़ा सवाल- प्रशासन आखिर किसका इंतज़ार कर रहा है?
Author: Pramod Gupta
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