December 14, 2025 1:37 pm

“बाज़ार में ज़हर की पैकिंग- ब्रांड का भरोसा, मिलावटखोरों ने तोड़ा”

प्रयागराज (समर सैम) थाना फाफामऊ पुलिस द्वारा नकली और कूटरचित ब्रांडेड उत्पादों के बड़े भंडाफोड़ की घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि हमारी बाज़ार व्यवस्था और उपभोक्ता सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। छापेमारी में अभियुक्त के पास से नकली देसी घी, तेल, नमक, टूथपेस्ट, तथा कई नामी कंपनियों के कॉपिराइट रैपर और पैकिंग सामग्री मिली, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 30 लाख रुपये बताई गई है। यह मामला स्पष्ट करता है कि यह कोई छोटा धंधा नहीं, बल्कि संगठित स्तर पर चल रहा अवैध कारोबार है। आज उपभोक्ता दुकानों से पैकेट में बंद सामान इसलिए खरीदता है क्योंकि उसे ब्रांड पर भरोसा होता है। पर जब वही पैकेट मिलावटखोरों द्वारा घरों और गोदामों में भरा जा रहा हो, तब उपभोक्ता के पास धोखे का शिकार बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। नकली देसी घी और edible oil न सिर्फ स्वाद को बिगाड़ते हैं, बल्कि दिल, जिगर और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। वहीं नकली टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक उत्पाद त्वचा, दाँत और आँखों पर खतरनाक प्रभाव छोड़ते हैं। यह सिर्फ धंधा नहीं, सीधे-सीधे जहर बेचने वाला अपराध है। सवाल यह है कि ऐसे धंधे फलते- फूलते कैसे हैं? इसका सीधा उत्तर है। लाभ की भूख, निगरानी की कमी और उपभोक्ता की लापरवाही। जब तक बाज़ार की हर खेप की गुणवत्ता जाँच नहीं होगी, जब तक अवैध पैकिंग बनाने वाली इकाइयों को जड़ से खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे गिरोह अपने तौर-तरीके बदलकर फिर सक्रिय हो जाएँगे। उपभोक्ता को भी जागरूक होना होगा। किसी भी उत्पाद को लेते समय MRP, Batch Number, Manufacturer Address, QR/Barcode Verification और पैकिंग की गुणवत्ता अवश्य देखें।प्रशासन की यह कार्रवाई सराहनीय है पर यह केवल शुरुआत है। जब तक मिलावटखोरी को आर्थिक अपराध नहीं माना जाएगा और इसके दोषियों पर सख्त सजा नहीं दी जाएगी, तब तक बाज़ार में नकली का खेल कम नहीं होगा।
यह लड़ाई स्वास्थ्य और भरोसे की है- और इसे जीतना ही होगा।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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