सोनभद्र। जनपद में स्वास्थ्य विभाग का हाल आज ऐसा है मानो “बिमारों का नहीं, भ्रष्टाचार का इलाज” किया जा रहा हो। गरीब जनता की जान जहाँ दांव पर लगी है, वहीं विभाग के अफसर सिर्फ खानापूर्ति की कार्रवाई में मशगूल हैं। नोडल अधिकारी गुलाब शंकर यादव द्वारा कुछ दिन पूर्व जिन अवैध हॉस्पिटलों और क्लीनिकों को सीज किया गया था, वही हॉस्पिटल महज कुछ दिनों के भीतर फिर से चालू हो गए। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खुली मिलीभगत और भ्रष्टाचार की जीवंत मिसाल है। सूत्र बताते हैं कि जनपद में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से दर्जनों फर्जी क्लीनिक, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। जहाँ न डिग्रीधारी डॉक्टर हैं, न लाइसेंस, न उपकरण। फिर भी हर महीने “रकम वसूली” के नाम पर इन्हें खुली छूट दी जाती है। यह व्यवस्था किसी सिंडिकेट से कम नहीं, जहाँ स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी खुद “रोग का बाजार” चला रहे हैं।एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर करने की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर सोनभद्र जैसे पिछड़े जनपद में जनता को झोलाछाप डॉक्टरों के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। जब सीज किए गए अस्पताल अगले ही दिन खुल जाते हैं, तो सवाल उठता है। क्या यह आदेश कागज़ी थे? क्या स्वास्थ्य विभाग के दफ्तर में वसूली के बिना कोई निर्णय नहीं होता? जनता अब जानना चाहती है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य जनसेवा है या धनसेवा। मरीजों की मौतों और गलत इलाज की घटनाएँ बताती हैं कि यहाँ CMO कार्यालय से लेकर फील्ड तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। अब ज़रूरत है उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की, ताकि सोनभद्र की मिट्टी में “लाइसेंसशुदा लापरवाही” का यह कारोबार खत्म हो। स्वास्थ्य विभाग को साफ करना अब शासन के लिए नहीं, बल्कि जनजीवन के लिए ज़रूरी हो चुका है।
Author: Pramod Gupta
Hello









