सोनभद्र। दशकों से अपनी जायज माँगों के लिए संघर्षरत आशा कार्यकत्रियों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से अपनी समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई है। कार्यकत्रियों का कहना है कि सरकार और संबंधित विभागों ने अब तक उनकी समस्याओं के प्रति कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।कार्यकत्रियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं जिला स्वास्थ्य समितियाँ सामान्य शिकायतों तक के निस्तारण में उदासीन हैं। भ्रष्टाचार एक परंपरा के रूप में जड़ें जमा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से किए जा रहे 99% कार्यों की कोई प्रोत्साहन राशि अदा नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि 74 निर्धारित कार्यों के अलावा भी अनेक विशेष जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती हैं, किंतु उनके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। कई कार्यों की प्रोत्साहन राशियों का वर्षों से पुनरीक्षण तक नहीं किया गया है। आशा कार्यकत्रियों ने यह भी कहा कि आधार प्रोत्साहन राशि, मंगल अभियान, प्रोत्साहन व राहत राशि और राज्य वित से मिलने वाले भुगतान लंबे समय से बकाया हैं। उन्होंने मांग की कि बकाया सभी भुगतानों का एकमुश्त निस्तारण किया जाए। कार्यकत्रियों ने सरकार से निम्न माँगें कीं आधार प्रोत्साहन व अन्य योजनाओं की बकाया राशियों का तत्काल भुगतान किया जाए। वर्ष 2018 से 2025 तक हुई विभिन्न दुर्घटनाओं में मृत आशा या आशा संगिनी के परिजनों को ₹2 लाख बीमा राशि और ₹10 लाख क्षतिपूर्ति दी जाए। वर्षों से लंबित प्रोत्साहन व अनुग्रह राशियों का ₹15 करोड़ का भुगतान तत्काल सुनिश्चित किया जाए। सभी जिलों में लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम के लिए ICC/ICCASH कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें आशा प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। वर्ष 2025 के बकाया भुगतान एवं राज्य वित्तीय अनुदान की राशि शीघ्र जारी की जाए। आशा यूनियन की अध्यक्ष तारादेवी, साविक जानकी देवी, तथा संगठन से जुड़ी नाजमा, शेख मोहम्मद कलीम अंसारी (AISA) सहित दर्जनों कार्यकत्रियों शिवांगी यादव, मेनिका, रामपरी देवी, सुशीला, ममता, अर्मिला देवी, कमलावती, चम्पा, अर्चिता देवी, गीता, सीता, प्रमिला, मंजू, निर्मला, राधिका, संगीता, बंदा देवी, सीमा, और मीना ने एक स्वर में आंदोलन की चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बकाया भुगतान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगी।
Author: Pramod Gupta
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