फिरोजाबाद (समर सैम) उत्तर प्रदेश की “डबल इंजन सरकार” भले ही तेज़ रफ़्तार विकास के दावे करे, मगर टूंडला में हुआ ताज़ा हादसा उन दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। बुधवार देर शाम टूंडला के लाइनपार क्षेत्र में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का एक पिलर अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में कई लोग घायल हुए और आसपास अफरा-तफरी मच गई। घटना स्थल पर जिला अधिकारी रमेश रंजन स्वयं पहुंचे, राहत कार्य शुरू कराया गया और घायलों को तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया। लेकिन यह सवाल अब जनता पूछ रही है- क्या हर हादसे के बाद सिर्फ़ “जांच के आदेश” देना ही विकास का जवाब है?
घायल मजदूरों की सूची- जिनकी ज़िंदगी अधर में लटकी हैनाम पता अस्पताल
कलुआ पुत्र महबूब खान चितावर, थाना चंदपा (हाथरस) एफ.एच. मेडिकल कॉलेज
जितेंद्र पुत्र महावीर सिंह चितावर, थाना चंदपा (हाथरस) जिला अस्पताल, फिरोजाबाद
विकास पुत्र रामदास चितावर, थाना चंदपा (हाथरस) जिला अस्पताल, फिरोजाबाद
साहिल पुत्र इरसाद नन्हेरा, थाना नागल (सहारनपुर) जिला अस्पताल, फिरोजाबाद
समीर पुत्र मुस्तफा माधोपुर, थाना नानौता (सहारनपुर) जिला अस्पताल फिरोजाबाद, इन सभी मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि न तो मौके पर सुरक्षा इंतज़ाम थे, न हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुल निर्माण की निगरानी करने वाले विभागीय इंजीनियर और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी?
घटिया निर्माण और निगरानी की कमी का नतीजा
स्थानीय लोगों के अनुसार, ओवरब्रिज निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ और काम की निगरानी बेहद कमजोर थी। यही वजह है कि आधा-अधूरा बना पिलर अचानक गिर पड़ा।
यह कोई अकेली घटना नहीं है
गुजरात के गम्भीरा पुल हादसे में नौ लोगों की मौत,
महाराष्ट्र के पुणे कुंडमाला पुल गिरने से चार मौतें और 50 से अधिक घायल, लखनऊ, वाराणसी और दिल्ली में सड़क धंसने की घटनाएँ इन सबने देशभर में विकास की “डबल इंजन” धारणा पर सवाल उठाए हैं।
Author: Pramod Gupta
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