सोनभद्र। जिला मुख्यालय पर बना फ्लाईओवर, जो कभी यातायात सुगमता का प्रतीक माना गया था, आज शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। उप्स द्वारा निर्मित इस फ्लाईओवर ने जहाँ सड़क जाम से राहत देने का वादा किया था, वहीं इसके निर्माण की खामियों ने नागरिकों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। बरसात के दिनों में पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण पूरा नगर झील का रूप ले लेता है। दुकानदारों के सामने पानी भर जाता है, लोगों के घरों में गंदा पानी घुस आता है और वाहन चालकों के लिए यह मार्ग हादसों का कारण बनता जा रहा है। फ्लाईओवर का डिज़ाइन और ढलान इस तरह से तैयार किया गया कि आसपास की गलियों में पानी उतरने का रास्ता ही नहीं बचा। बारिश के बाद घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है। नागरिकों ने कई बार विरोध दर्ज कराया, लेकिन तत्कालीन सरकार की अनदेखी के चलते समस्या जस की तस रही। अब उम्मीद की किरण जगी है जब सदर विधायक भूपेश चौबे ने इस गंभीर समस्या को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया है।विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर स्पष्ट कहा कि यह निर्माण तकनीकी और भू-आकृतिक दृष्टि से गलत तरीके से कराया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि निकासी व्यवस्था और ढलान को पुनः डिज़ाइन न किया गया, तो आने वाले वर्षों में नगर की स्थिति और भयावह हो जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा इस विषय पर गंभीरता दिखाना निश्चय ही राहत की खबर है। फ्लाईओवर के कारण नागरिकों को जो कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं—जैसे पानी भराव, ट्रैफिक जाम, सड़क किनारे की दुकानों का नुकसान, और सार्वजनिक आवागमन में बाधा- वह प्रशासनिक लापरवाही की एक मिसाल है। इस समस्या का समाधान सिर्फ़ बयानबाज़ी से नहीं, बल्कि तकनीकी पुनर्मूल्यांकन और तत्काल सुधार कार्यों से ही संभव है। अब जबकि मुख्यमंत्री ने हर बिंदु पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जनता को यह उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और जिला मुख्यालय को झीलनुमा शहर बनने से बचाया जाएगा। विकास तभी सार्थक कहलाएगा जब वह जनता को सुविधा दे, न कि परेशानी। सोनभद्र के नागरिक अब सिर्फ़ वादों पर नहीं, ठोस कदमों पर भरोसा करना चाहते हैं।
Author: Pramod Gupta
Hello









