सोनभद्र। जनपद मुख्यालय राबर्ट्सगंज से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोईठहरी गढ़वा गाँव की सड़कें इस कदर जर्जर हो चुकी हैं कि अब इन्हें सड़क कहना भी मुश्किल हो गया है। यह मार्ग सीधे पलिया गाँव तक जाता है और कई गाँवों की जीवनरेखा भी है, लेकिन आज यह सड़क गड्ढों, कीचड़ और पानी से लबालब होकर नरकीय हालात पेश कर रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि स्कूली वाहन इस गाँव में आने से साफ इनकार कर चुके हैं। परिणामस्वरूप यहाँ के मासूम बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। रोज़ सुबह स्कूल जाने का सपना लेकर उठने वाले इन बच्चों को दलदल जैसी सड़कों ने कैद कर दिया है। उनके माता-पिता विवश हैं कि बच्चों को पैदल कीचड़ भरे रास्तों से भेजें, लेकिन आए दिन फिसलकर चोटिल होते बच्चे और ग्रामीण इस पीड़ा को और गहरा कर रहे हैं। गाँव के बुजुर्ग बताते हैं कि बरसात के दिनों में यह मार्ग जलाशय का रूप ले लेता है। सड़क गायब हो जाती है और लोग घंटों तक रास्ता खोजते रह जाते हैं। कई बार बीमार मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सका, जिससे गंभीर खतरे खड़े हो गए। यह सब राबर्ट्सगंज जैसे बड़े मुख्यालय के नज़दीक हो रहा है, जो जिम्मेदारों की लापरवाही पर सीधा सवाल खड़ा करता है।घोरावल विधानसभा क्षेत्र में आते इस गाँव की दुर्दशा यह भी साबित करती है कि विकास के वादे केवल चुनावी मंच तक सीमित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो पंचायत ने ध्यान दिया, न ही लोक निर्माण विभाग ने। कई गाँवों की ज़िंदगी इसी सड़क पर टिकी है, मगर कोई पुरसाहाल नहीं- यह दर्द हर ग्रामीण के लहजे में साफ झलकता है। आज जब सरकारें सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता बताती हैं, तब गोईठहरी गढ़वा गाँव की यह बदहाल सड़क उनके दावों को आईना दिखा रही है। यह सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर विकास की रोशनी गाँवों तक कब पहुँचेगी? ग्रामीणों की यही मांग है कि तुरंत सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चे फिर से स्कूल जा सकें और आम जनजीवन पटरी पर लौट सके।
Author: Pramod Gupta
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