वैश्विक समीकरण बदलते हुए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत समेत पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। अगस्त से लागू 50% टैरिफ और H1B वीज़ा शुल्क में 1 लाख रुपये की बढ़ोतरी भारतीय प्रोफेशनल्स पर सीधा वार है। वहीं, दवा कंपनियों पर 100% टैक्स ने भारतीय फ़ार्मा इंडस्ट्री को गहरा झटका दिया।
चीन का बड़ा फैसला
अमेरिकी दबाव के ठीक उलट चीन ने भारतीय दवा कंपनियों से 30% टैक्स हटा लिया। अब भारतीय दवाइयाँ बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चीन को निर्यात होंगी। इससे भारत को बड़ा आर्थिक फायदा मिलेगा और ट्रंप की रणनीति को सीधा धक्का लगेगा।
रूस भी उतरा समर्थन में
रूस ने भी भारत का साथ देते हुए अमेरिकी टैरिफ नीति को “एकतरफा और ग़ैर-न्यायसंगत” करार दिया। साथ ही इशारा किया कि भारत चाहे तो रूसी बाज़ार में फ़ार्मा और आईटी सेक्टर के लिए दरवाज़े और चौड़े हो सकते हैं।
बदलते शक्ति संतुलन
स्पष्ट है कि अब वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं। अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति उसे ही “अकेला” करती दिख रही है। दूसरी ओर भारत, रूस और चीन का यह साझा मोर्चा न सिर्फ़ ट्रंप को झटका देगा बल्कि एशिया को नई आर्थिक ताक़त के रूप में स्थापित कर सकता है।
बड़ा सवाल
क्या ट्रंप की टैरिफ राजनीति सचमुच अमेरिका को अलग-थलग कर देगी?
दुनिया की निगाहें अब इस तिकड़ी- भारत, चीन और रूस- पर टिकी हैं।
Author: Pramod Gupta
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