प्रयागराज (समर सैम) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज बहुचर्चित गैंगस्टर एक्ट के मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी, उनके भाई रिज़वान सोलंकी और साथी इजराइल आटावाला को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने दोपहर 2 बजे के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीनों को जमानत मंजूर कर दी। इस फैसले के बाद अब इनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। गौरतलब है कि 2 सितंबर को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया था। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया था। उनका कहना था कि आरोपी मुख्य साजिशकर्ता हैं, इसलिए समानता (parity) के आधार पर उन्हें राहत नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, इरफान सोलंकी की ओर से अधिवक्ता इमरान उल्लाह ने दलील दी कि इसी प्रकरण में अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, ऐसे में उनके मुवक्किल भी समानता के सिद्धांत पर जमानत पाने के हकदार हैं।
जाजमऊ आगजनी केस से जुड़ा मामला
यह मामला 7 नवंबर 2022 की रात का है, जब कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र की डिफेंस कॉलोनी में रहने वाली महिला नजीर फातिमा के अस्थायी मकान में आग लगा दी गई थी। आरोप है कि उस समय उनका परिवार शादी समारोह में गया हुआ था। वापसी पर उन्होंने पाया कि पूरा घर जलकर राख हो गया है। इसमें गृहस्थी का सारा सामान, टीवी, फ्रिज और सिलेंडर तक जल गए। नजीर फातिमा ने इरफान सोलंकी, उनके भाई रिजवान और साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। आरोप यह था कि विधायक परिवार ने साजिश के तहत आगजनी कराई ताकि वे घर खाली कर दें और उनकी जमीन पर कब्जा किया जा सके। जांच के बाद इरफान सोलंकी, रिजवान, इजराइल आटावाला सहित कई अन्य पर गैंगस्टर एक्ट और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। 7 जून 2023 को कानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने इरफान, रिजवान और अन्य को दोषी मानते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी और 30,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
24 महीने से जेल में थे बंद
पिछले 24 महीनों से इरफान सोलंकी महाराजगंज जेल में बंद थे। उनकी गिरफ्तारी और सजा को लेकर प्रदेश की राजनीति में लगातार बयानबाज़ी होती रही। विपक्ष ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया, जबकि सरकार ने इसे “कानून का राज” कहकर उचित ठहराया। आज हाईकोर्ट के फैसले के बाद इरफान सोलंकी और उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। समाजवादी पार्टी इसे “न्याय की जीत” बताकर सियासी लाभ लेने की कोशिश करेगी, वहीं सरकार के लिए यह फैसला नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
आगे की सियासत पर असर
इरफान सोलंकी की छवि कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट से मजबूत मुस्लिम नेता की रही है। उनकी रिहाई से न सिर्फ़ पार्टी का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय राजनीति में भी नए समीकरण बनने की संभावना है। जैसा कि एक सियासी विश्लेषक ने कहा है
यह सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत के लिए आने वाले समय का संकेत है।
Author: Pramod Gupta
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