प्रयागराज (समर सैम) उत्तर प्रदेश के मदरसों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन 558 मदरसों की जांच प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिनके खिलाफ फर्जी नियुक्तियों के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से कार्यवाही की मांग की गई थी। इस मामले में सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को जांच के आदेश दिए थे। लेकिन वाराणसी स्थित टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया और अन्य दो संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिना ठोस सबूत और सुनवाई के इस तरह की जांच न केवल शिक्षकों की छवि को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डबल बेंच ने जांच पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में सरकार का पक्ष और तथ्यों की गहन जांच सामने नहीं आती, तब तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि बीते दिनों मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर EOW को जांच सौंपने का निर्णय लिया गया था। लेकिन अदालत के ताज़ा आदेश के बाद अब यह प्रक्रिया रुक गई है। अदालत ने कहा है कि शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था पर जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और सभी पक्षों को निष्पक्ष अवसर दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह मामला धार्मिक और सामाजिक रूप से भी संवेदनशील है, ऐसे में जांच से पहले निष्पक्षता और पारदर्शिता ज़रूरी है। वहीं, सरकार का कहना है कि शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जांच आदेश दिए गए थे। अगली सुनवाई तक जांच पर रोक जारी रहेगी और सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करना होगा। इस फैसले से न केवल 558 मदरसों को राहत मिली है, बल्कि मदरसा शिक्षा से जुड़े हजारों शिक्षकों और छात्रों को भी फिलहाल बड़ी राहत महसूस हुई है।
Author: Pramod Gupta
Hello









