December 12, 2025 6:32 am

सत्ता का दबाव और चिकित्सा की गरिमा

ज़ुल्म ढाएंगे तो लफ्ज़ों से बगावत होगी,
खामोशी भी कभी इनक़लाब बन जाती है।

इटावा (समर सैम) घटना एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब सत्ता या वर्दी का दबाव टूटता है, तो सबसे अधिक चोट संवेदनशील वर्ग पर पड़ती है। बीती रात एसएसपी की मां की तबियत बिगड़ने पर पुलिस टीम जिला अस्पताल पहुँची और वहां से डॉक्टर व फार्मासिस्ट को जबरन उठा लाई। आरोप है कि थानेदार ने डॉक्टर का मोबाइल छीना, धक्का दिया और यहां तक कि लॉकअप में डालने की धमकी दी। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि तंत्र की कार्यशैली और मानसिकता पर गहरा सवाल है। डॉक्टरों ने विरोधस्वरूप काम बंद कर दिया। उनका आक्रोश जायज़ था, क्योंकि सेवा का भाव जब दबाव और धमकी में बदल जाए, तो गरिमा आहत होती है। डॉक्टर समाज की नब्ज थामे हुए हैं, लेकिन अगर वे ही असुरक्षित महसूस करने लगें तो पूरा स्वास्थ्य तंत्र लड़खड़ा जाएगा। एसएसपी ने घटना के बाद माफी मांगी और दो सिपाहियों को निलंबित किया। यह कदम राहत तो देता है, मगर क्या यहीं बात खत्म हो जाती है? समस्या केवल दो सिपाहियों की नहीं, बल्कि उस सोच की है जिसमें वर्दी अपने अधिकार से ऊपर समझी जाने लगती है। पुलिस और स्वास्थ्य सेवा, दोनों ही जनता की ज़रूरत हैं। इनके बीच टकराव का मतलब है—विश्वास का संकट। यह तर्क दिया जा सकता है कि मां की तबियत बिगड़ना असाधारण स्थिति थी और पुलिस घबराहट में कदम उठा बैठी। पर सवाल यह है कि क्या घबराहट में क़ानून और मर्यादा तोड़ी जा सकती है? अस्पताल में चिकित्सक उपलब्ध न होने पर विकल्प तलाशे जा सकते थे, लेकिन डॉक्टर का मोबाइल छीनना और धमकाना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। इस घटना को चेतावनी मानना होगा। प्रशासन को चाहिए कि पुलिस बल को मानवीय संवेदनशीलता और आपातकालीन प्रबंधन की नई ट्रेनिंग दे। साथ ही डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कठोर प्रावधान लागू हों। डॉक्टर का सम्मान केवल उनके पेशे का नहीं, बल्कि समाज के जीवन का सम्मान है। जनता का भरोसा तभी कायम रहेगा जब सत्ता का दबाव सेवा की गरिमा को कुचलने के बजाय सहयोग में बदले। लोकतंत्र में शक्ति का अर्थ सेवा है, न कि दबंगई।

हमसे छीनोगे तो कलम और धारदार होगी,
ज़मीर सोता नहीं, बस इंतज़ार करता है।

निष्कर्षतः, दो सिपाहियों का निलंबन केवल शुरुआत है। असली सुधार तब होगा जब पूरे तंत्र की सोच बदलेगी। पुलिस और डॉक्टर दोनों ही जनता के लिए बने हैं। दोनों अगर साथ मिलकर चलें तो विश्वास मजबूत होगा, और अगर दबाव-धमकी का सिलसिला जारी रहा तो सबसे बड़ा नुकसान समाज को उठाना पड़ेगा।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

Hello

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल

error: Content is protected !!