– खनन माफ़िया के खिलाफ कार्रवाई, गाँव-गली में चर्चा
– “सच बोलता है गूंगा भी, जब ज़ुल्म हद से बढ़ जाए-
पत्थरों में भी दरारें, आँसू बनकर झर जाएं।”
सोनभद्र (समर सैम) मिर्ज़ापुर खनिज विभाग की दबिश ने जिले के खनन कारोबारियों और पासरों की नींद उड़ा दी है। अहरौरा थाना क्षेत्र में खनिज विभाग ने अवैध उपखनिज से भरा ट्रक पकड़ा तो चालक मौके से भाग गया। जांच के बाद पाँच लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया, जिनमें जिले के नामचीन खनन व्यापारी रमाशंकर दुबे भी शामिल हैं।
गाँव-गली में सनसनी
घटना के बाद आस-पास के गाँवों में खासी चर्चा है। लोग चाय की दुकानों से लेकर चौपाल तक एक ही बात कर रहे है
“अबकी बार अगर प्रशासन सख़्त रहा तो इन माफ़ियाओं की दुकान बंद हो जाएगी।” स्थानीय किसान रामधनी कहते हैं, “खनन माफ़िया की वजह से रास्ते बर्बाद हो गए हैं। धूल और ट्रकों के शोर से जीना मुश्किल है।”
आरोपियों की पहचान
1. रमाशंकर दुबे- बड़े खनन व्यापारी, लंबे समय से विवादों में
2. शाकिर खान- ट्रक मालिक
3. मुमताज खान- पासर, जो परमिट का खेल खेलता था
4. बसंत केशर- क्रशर प्लांट संचालक
5. एक अन्य वाहन मालिक
पासर का ‘खेल’
पासर मुमताज खान पर आरोप है कि वह गैर-जनपद का ईएमएम-11 परमिट इस्तेमाल कर गिट्टी भरे ट्रकों को वैध दिखाता था। जब भी प्रशासनिक जांच होती, परमिट का गलत इस्तेमाल कर गाड़ियों को बचा लेता। इसी वजह से वर्षों से यह अवैध धंधा फल-फूल रहा था।
प्रशासन की सख़्ती
खनिज अधिकारी जितेंद्र सिंह और थाना प्रभारी अजय सेठ की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज हुआ। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक़ अब जिले में और भी कई ट्रकों व खनन पट्टों की जांच होगी।
जनता की प्रतिक्रिया
व्यापारी वर्ग कह रहा है, “अगर यह कार्रवाई सचमुच आगे बढ़ी तो खनन का धंधा साफ-सुथरा होगा।” वहीं, युवाओं का मानना है कि खनन माफ़िया की वजह से इलाके में अपराध भी बढ़े हैं। कुछ लोगों को अब भी शक है कि रसूख़दार व्यापारी कानून की पकड़ से बच निकलेंगे।
राजनीतिक असर
रमाशंकर दुबे का नाम सामने आने से सियासी गलियारों में हलचल है। कहा जा रहा है कि उनकी सत्ता से नज़दीकी लंबे समय से उन्हें बचाती रही है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक कार्रवाई किस अंजाम तक पहुँचती है। एक शेर बस बात ख़त्म। “पत्थरों की बोली चुप नहीं रहती,
जब अन्याय बढ़ता है आवाज़ खुद निकलती है।”
Author: Pramod Gupta
Hello









