लाश को कांधे पे ढोना पड़ा हमें,
जिन्हें पुकारा वही खामोश खड़े रहे।
सोनभद्र (समर सैम) जिले से निकला यह मंजर इंसानियत को झकझोर देने वाला है और शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है। दुद्धी तहसील क्षेत्र में एक महिला की मौत हो जाने के बाद परिजन घंटों तक एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे, पर जब कोई मदद नहीं पहुंची तो उन्हें मजबूरी में मृतका को साड़ी में लादकर रोते-बिलखते लगभग 500 मीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ी। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कई बार 108 और स्वास्थ्य केंद्र से एम्बुलेंस की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई वाहन नहीं आया। हालात ऐसे बने कि परिजनों को शव को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा। यह दृश्य देखने वाले लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरे क्षेत्र में गुस्से की लहर दौड़ गई। सवाल यह है कि जिन सरकारी दावों में “बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और हर आपातकालीन सुविधा” का ढोल पीटा जाता है, उन पर भरोसा कौन करे? दुद्धी क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है। आए दिन स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता और एम्बुलेंस की नाकामी सामने आती रहती है। इसके बावजूद जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं। यह हादसा सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं बल्कि पूरे तंत्र की नाकामी की गवाही है। साड़ी में लिपटे शव को ढोते परिजनों की तस्वीर ने सरकारी वादों की पोल खोल दी है।
जिन्हें इंसाफ़ की आस थी, वही गुमनाम निकले,
मौत पर भी जो न आए, ऐसे हुक्मरान निकले।
Author: Pramod Gupta
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