– जिस खेत से दहकती हो मजदूर की लाशें,
उस खेत के हर गोशे में बारूद बोया होगा।
सोनभद्र (समर सैम) सदर कोतवाली क्षेत्र के सुकृत गाँव स्थित खनन बेल्ट में शनिवार को दिलदहला देने वाला हादसा पेश आया। पत्थर निकालने के लिए की जा रही ब्लास्टिंग अचानक इतनी भीषण हो गई कि दो मजदूर उसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके के बाद अफरा-तफरी मच गई और मजदूर जान बचाकर भागते दिखे। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। यह हादसा एक बार फिर सोनभद्र जिले के खनन बेल्ट की भयावह हकीकत को उजागर करता है। पूरे कुएँ में सुरक्षा व्यवस्था की जगह “भांग” पड़ी हुई है। न मजदूरों को सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं, न ही ब्लास्टिंग के समय उन्हें सुरक्षित दूरी पर हटाया जाता है। प्रशासन और जिला खनिज विभाग लगातार शिकायतों के बावजूद आँख मूँदकर बैठे रहते हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा कि खदान संचालकों को मजदूरों की जान की कोई परवाह नहीं है, बस खनिज संपदा से मोटा मुनाफा कमाना ही उनका लक्ष्य है।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के वक्त कोई सुरक्षा मानक लागू नहीं था। यही वजह रही कि मजदूर सीधे विस्फोट की चपेट में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और खनिज विभाग की मिलीभगत के चलते खनन बेल्ट मौत का कुआँ बन चुका है। आए दिन हादसे होते रहते हैं, परंतु जिम्मेदार विभाग हादसे के बाद औपचारिक जांच का ढोल पीटकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं। हादसे के बाद पुलिस ने खदान को अस्थायी रूप से बंद कराया और जांच शुरू की, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई मजदूरों की जिंदगी बचा पाएगी? आखिर कब तक गरीब श्रमिक अपनी रोज़ी-रोटी की तलाश में जान जोखिम में डालने को मजबूर रहेंगे? यदि जिला प्रशासन और खनिज विभाग समय रहते कड़े कदम उठाते तो शायद यह दुर्घटना टल सकती थी। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी खदान संचालकों पर कठोर कार्रवाई हो और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।ज़ुल्म ढहता नहीं है जब तलक आवाज़ न उठे,
अब तो मिट्टी भी कह रही है- बस बहुत हुआ।
Author: Pramod Gupta
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