सोनभद्र। सदर कोतवाली क्षेत्र के सुकृत गाँव स्थित खनन बेल्ट में शनिवार को ब्लास्टिंग के दौरान बड़ा हादसा हो गया। अचानक हुए विस्फोट की चपेट में आने से तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दिलदहला देने वाली घटना उस वक्त घटी जब खदान में पत्थर निकालने के लिए ब्लास्टिंग की जा रही थी। धमाके की आवाज पूरे इलाके में गूंजी और मजदूर जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ब्लास्टिंग के समय न तो मजदूरों को सुरक्षित दूरी पर किया गया था और न ही उन्हें किसी तरह के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। यह घटना खनन कार्यों में हो रही लापरवाही और अव्यवस्था को उजागर करती है। सोनभद्र जिले के खनन बेल्ट में लंबे समय से सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती रही है, लेकिन जिला प्रशासन और जिला खनिज विभाग मौन साधे बैठे रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे खनन कुँए में अव्यवस्था और “भांग” पड़ी हुई है। खदान संचालकों को मजदूरों की जान की परवाह नहीं, बस खनिज संपदा से मुनाफा कमाने की होड़ है।ग्रामीणों ने बताया कि खनन क्षेत्र में आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, परंतु जिम्मेदार विभाग आंख मूँदकर बैठे रहते हैं। इस बार का हादसा बड़ा होने से फिर से लोगों में आक्रोश पनपा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर कब तक मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जाएगा। कई बार लिखित व मौखिक शिकायतों के बावजूद खदानों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ। इस हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर खदान को अस्थायी रूप से बंद कराया और मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं खनिज विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि जांच के बाद ही कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल यह है कि हादसे के बाद ही विभाग क्यों जागता है? क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती है कि हर बार खून-खराबे के बाद ही सुरक्षा का ढोल पीटा जाए? सुकृत गाँव का यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही की एक और मिसाल बन गया है। यदि जिला प्रशासन और खनिज विभाग समय रहते सुरक्षा मानकों को लागू करवाते तो शायद दो मजदूरों की जिंदगी दांव पर न लगती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी खदान संचालकों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह हादसा एक बार फिर सोनभद्र के खनन बेल्ट की सच्चाई सामने लाता है कि यहां प्रशासन और विभाग की मिलीभगत के चलते खदानें मौत का कुआँ बन चुकी हैं। अब देखने वाली बात होगी कि इस भीषण घटना के बाद क्या जिम्मेदार जागेंगे या फिर हमेशा की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
Author: Pramod Gupta
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