सोनभद्र। जनपद में गुरमा रेंज अवैध खनन का केंद्र बिंदु बन गया है। अवैध खनन को लेकर वन विभाग की उदासीनता समझ से परे है। लंबे समय से अवैध बालू खनन के लिए चर्चित होने के बावजूद गुरमा रेंज में इस पर रोक न लगने से स्थानीय विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर उंगलियां उठने लगी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कैमूर वन्यजीव वन प्रभाग मिर्जापुर के अंतर्गत आने वाले गुरमा रेंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सोन नदी माफियाओं के लिए बालू खनन का सुरक्षित जोन बनी हुई है। जहां से अवैध बालू का परिवहन करके खननकर्ता लाखों का वारा न्यारा कर रहे है। आश्चर्य की बात यह है कि वन विभाग के जिम्मेदार इसे रोकने में क्यों उदासीन है। इसकी गोपनीय तरीके से उच्च स्तरीय जांच हो जाए तो पूरा मामला उजागर हो जाएगा। करगरा वन क्षेत्र अंतर्गत नदी घाट से लेकर गुरदह सोन नदी तक रात में न केवल बालू का अवैध खनन जोरों पर चल रहा है, बल्कि खनन माफिया नदी क्षेत्र से बेखौफ होकर अवैध बालू परिवहन भी करा रहे है। इसी दौरान वे मौके पर अवैध खनन का कोई प्रमाण न मिले, इसके लिए खनन से हुए गड्डों को बराबर करा देते हैं। सूत्रों की माने तो अवैध खनन कर्ताओं को किसी भी विभागीय अधिकारी के आवागमन की सटीक जानकारी बराबर मिलती रहती है। जिससे वे भयमुक्त होकर अपने इस गोरखधंधे को अंजाम तक पहुंचा रहे है। जबकि इस अवैध कार्य की सूचना बराबर दी जाती है। जिसे वे अवैध खनन करने वालों तक पहुंचा देते हैं। अवैध खनन कर्ता उन्हें अर्दब में लेकर उनकी आवाज दबा देते है। इसी लिए गुरमा रेंज में काफी दिनों से चल रहे अवैध बालू खनन पर न तो लगाम लग पा रही है और न ही इसके लिए जिम्मेदारों पर ही कोई कठोर कार्रवाई हो रही है।
गुरमा कैमूर वन्य जीव रेंज का मामला काफी जटिल है। बताया जाता है कि करगरा गुरदह वन क्षेत्र में कई वर्षों से एक एक कर्मी तैनात है। जिसे यथावत रखकर अधिकारी अपने निहित स्वार्थ की पूर्ति कर रहे हैं।
Author: Pramod Gupta
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