October 11, 2026 5:01 am

घर से सड़क पर सोनांचल ट्रक एसोसिएशन की महाभारत

सोनभद्र (समर सैम) सोनांचल ट्रक ओनर्स एसोसिएशन के स्वर्णिम युग का अनायास अवसान हो चुका है। एक सूरज का अनायास डूबना सचमुच एक विस्मयकारी घटना है। कभी यूनियन की संघटनात्मक शक्ति के आगे जिला प्रशासन नतमस्तक हो जाता था। कितनी बार इसने मोटर मालिकों के हितों को देखते हुए सफल धरना प्रदर्शन का आयोजन कर प्रदेश सरकार की चूलें हिला दी थी। जब जब ये हड़ताल पर गये तब तब राजस्व काफी कम हो गया था। यही नहीं वाराणसी शक्तिनगर की रफ़्तनी रुक गई थी। जिसका असर समूचे पूर्वांचल में दिखाई पड़ा था। इसका सीधा सा कारण यह है कि सोनभद्र की गिट्टी एवं बालू पूरे पूर्वांचल में विख्यात है। जब गिट्टी बालू का परिवहन रुका तो पूरे पूर्वाचल पर इसका असर पड़ा। यही कारण है कि पूर्वाचल में एसोसिएशन के अध्यक्ष को काफी अहमियत दी जाती हैं। उनकी ट्रकों को तमाम सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। अध्यक्ष दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। बाकी लोग हाशिये पर डाल दिये गए हैं। यही से संघठन के भीतर बग़ावत हो गई। एक दूसरे पर तमाम आरोप प्रत्यारोप लगने लगे। इन सब के बीच अधिकारियों को भी फर्जी नामों से शिकायत कर पीसा जाने लगा। यह जंग सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। इनसब में कितनी सच्चाई है यह जांच का विषय है। सोनांचल ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन में फूट। सदस्यों ने अध्यक्ष पर लगाये गंभीर आरोप। अध्यक्ष के द्वारा सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने एवं बाकी मोटर मालिकों को अनदेखा करने से नाराज़गी ने अलगाववाद को जन्म दिया। नाराज़गी इस कदर बढ़ी की तकरीबन 80 के करीब सदस्यों ने लिखित में प्रस्ताव पारित कर एसोसिएशन को भंग कर दिया। यही नहीं सम्बंधित अधिकारियों को एसोसिएशन भंग होने की लिखित सूचना भी दे दी। सोनांचल ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन का गठन सितंबर 2021 में करते हुए पंजीकरण कराया गया था। संघठन का मूल उद्देश्य मोटर हितास व वाहन का सुचारू रूप से संचालन था। इसके विपरीत संघठन कुछ लोगों की वजह से समस्त वाहन स्वामियों के अपेक्षा के अनुरूप कार्य नहीं कर रहा था। जिसके फलस्वरूप दिनांक 17 नवम्बर 2022 को एक सार्वजनिक मीटिंग बुलाकर सोनांचल ट्रक मोटर एसोसिएशन को सर्वसम्मति से भंग कर दिया गया।जिसमें तत्कालीन पदाधिकारियों की सहमति ली गई थी। वहीं कुछ मोटर मालिकों ने लिखित में शिकायत अधिकारियों से करते हुए कहा कि संघठन के नाम से कुछ लोग अधिकारियों से वार्ता कर रहे हैं। जबकि हम समस्त वाहन स्वामियों का वर्तमान में न तो कोई संघठन है और न ही हमारा कोई प्रतिनिधि है। शिकायत पत्र में आगे यह भी लिखा है कि भविष्य में यदि कोई हम समस्त वाहन स्वामियों के प्रतिनिधि के रूप में आपसे वार्ता करता है तो उसे हमारा प्रतिनिधि न समझा जाये। साथ ही उसके वक्तव्य एवं क्रियाकलापों को उसका व्यक्तिगत समझा जाए। इस लिखित शिकायती पत्र पर तकरीबन 80 मोटर मालिकों ने मोबाईल नम्बर सहित हस्ताक्षर किए हैं। वहीं दिनांक 7 अक्टूबर 2024 को लिखित सरफराज अहमद पुत्र जैनुल निवासी प्रीत नगर चोपन का पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो अपने आपको को सोनांचल ट्रक ओनर्स एसोसिएशन का सचिव बताते हुए पद से स्थिफ़ा देने का ज़िक्र कर रहे हैं। परंतु स्थिफ़ा देने के कारण का ज़िक्र पत्र में नहीं है। कुछ मोटर मालिकों का कहना है कि एसोसिएशन से जुड़े कुछ लोग मोटर मालिकों के नाम से अधिकारियों की फर्जी शिकायत कर रहे हैं। ऐसी ही शिकायत खान अधिकारी की उच्चाधिकारियों से करते हुए उन्हें पासर बताया गया था। फर्जी शिकायती पत्रों के बाद ही संघठन की लड़ाई तेज़ हो गई। अब एक दूसरे पर सीधे आरोप प्रत्यारोप लगाने का दौर शुरू हो गया है। इस लडाई में जहां एक ओर फर्जी नामों से अधिकारियों की शिकायत कर उन्हें अपनी लडाई का मोहरा बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर एसोसिएशन के क्रियाकलापों से नाराज़ कुछ मोटर मालिकों ने एसोसिएशन के कर्ता धर्ता पर ही कई गंभीर आरोप लगा डाले। आरोप है कि अध्यक्ष की गाड़ियां पूर्वांचल में बिना इंट्री के बेधड़क चल रही है। वहीं दर्जनों ट्रकों का नम्बर भी वायरल किया गया है। जिसे वायरल कर दावा किया गया है कि यह लगातार मध्यप्रदेश की परमिट पर चलते हैं। जो अधिकारी इनकी बात नहीं मानता उन पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जाता है। वायरल ट्रक नम्बर वाली सूची की जांच हो तो पता चलेगा कि 21 मार्च 2024 से लेकर अप्रैल एवं जून व जुलाई तक लगातार यह सब ट्रकें मध्यप्रदेश के पन्नों पर अवैध परिवहन की है। इन सब वाहनों की रॉयल्टी के पन्ने भी इल्ज़ाम लगाने वाले सुरक्षित रखे हुए हैं। यही नहीं कुछ मोटर मालिकों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि खान अधिकारी आशीष कुमार सेन के पीरियड में दबाव डालकर ऑनलाइन चालान डिलीट कराया गया है। इनका रिकॉर्ड उनके वाहन संख्या से मिलाया जा सकता है।कैंसिल चालान का डिटेल माइंड मित्रा ऐप पर उपलब्ध होने का दावा भी किया जा रहा है। खैर इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह सब जांच का विषय है। वहीं एसोसिएशन के आपसी जूतम पैजार में जिला खान अधिकारी पर फर्जी लोगों के नाम से शिकायत कर उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। जबकि खान अधिकारी ने लगातार खनिज परिवहन कर रहे वाहनों की जांच कर धर पकड़ अभियान चला रखा है।खान अधिकारी ने अप्रैल से अक्टूबर तक 5826 ओवरलोड वाहनों का चालान करते हुए 18 करोड़ दस लाख रुपए जमा करवाया। यही नहीं युवा एवं तेजतर्रार खान अधिकारी ने एम एम 11 के बगैर परिवहन करने पर जनपद सोनभद्र के विभिन्न थानों पर 77 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज़ करवाया। इनमें क्रेशर संचालक, मोटर मालिक एवं पासर भी शामिल हैं। इसके बाद भी खान अधिकारी के खिलाफ फर्जी शिकायत पत्र उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर उनका मनोबल तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि बेरोकटोक बिना परमिट के ओवरलोड परिवहन किया जा सके। खैर फर्जी शिकायती पत्र का इतना असर हुआ कि पहली बार जिले में जिलाधिकारी के द्वारा टोलप्लाज़ा से लेकर सलखन तक ट्रकों की जांच स्वयं की गई। डीएम ने 23 अक्टूबर 2024 को 31 गाड़ियों का चालान करते हुए 15 लाख 31 हज़ार रुपये जमा करवाया। डीएम के साथ इस अभियान में खान अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं समूचे जनपद में एसोसिएशन के भीतर हो रहे नूरा कुश्ती की चर्चा आम हो चुकी है। बगावती तेवरों से ऐसा लगता है कि जल्दी ही सोनभद्र में मोटर मालिकों का एक और संघठन भी गठित हो जाएगा। अंत में एक शेर बस बात खत्म, “एक ही उल्लू काफी है बर्बाद गुलिस्तां करने को। हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा”।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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